Isro Pslv C62 Mission : आसमान में आज एक और ‘आंख’ भेजेगा भारत

Earth-observation

नई दिल्ली : आज का दिन भारत के लिए ऐतिहासिक होने वाला है। भारत न्यू ईयर (2026) पर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक इतिहास रचने जा रहा है। आज लॉन्च किए जा रहे मिशन को आसमान में भारत की एक और आंख स्थापित होना बताया जा रहा है। खास बात यह है कि आज भारत सिर्फ अपना ही मिशन लॉन्च नहीं कर रहा। बल्कि, विदेशी एजेंसी के साथ-साथ भारतीय स्टार्टअप्स के 17 सैटेलाइट भी लॉन्च करने जा रहा है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इस साल (2026) का अपना पहला लॉन्च PSLV C62 मिशन आज (12 जनवरी) सुबह 10.17 बजे श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष स्टेशन के लॉन्च पैड से करने जा रहा है। इस रॉकेट के जरिए एक एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1 (कोड-नेम ‘अन्वेषा’) लॉन्च की जाएगी, जो अंतरिक्ष से होने वाली भारतीय निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने में मदद करेगी। इस मिशन की एक खासियत यह भी है कि मुख्य पेलोड EOS-N1 के अलावा, PSLV एक यूरोपीय डेमोंस्ट्रेटर सैटेलाइट के साथ भारतीय और विदेशी एजेंसियों के 17 दूसरे सैटेलाइट भी लेकर जाने वाला है।

EOS-N1 एक हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट है। इसे DRDO के लिए डेवलप किया गया है। यह जमीनी चीजों को पहचानने के लिए सैकड़ों वेवलेंथ में ‘देखने’ में सक्षम है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और निगरानी के लिए एक बहुत जरूरी एसेट है। यह भारत को अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने में मदद करेगा। इसका इस्तेमाल खेती, शहरी मैपिंग और पर्यावरण ऑब्जर्वेशन जैसे क्षेत्रों में भी किया जाएगा।

दूसरे सेकेंडरी पेलोड में भारतीय स्टार्टअप और यूनिवर्सिटी के क्यूबसैट शामिल हैं, जिनमें सीवी रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी का CGUSAT-1, ध्रुव स्पेस का DA-1, स्पेस किड्ज इंडिया का SR-2, असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी का लचित-1, अक्षत एयरोस्पेस का Solaras-S4 और दयानंद सागर यूनिवर्सिटी का DSAT-1 शामिल हैं। OrbitAID एयरोस्पेस AayulSAT के साथ इतिहास रचने जा रहा है, जो भारत का पहला ऑन-ऑर्बिट सैटेलाइट रिफ्यूलिंग पेलोड है।