नई दिल्ली : प्रवर्तन निदेशालय यानी कि ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ जंग में एक बड़ा कदम उठाया है। 21 अगस्त 2025 को ईडी ने पहली बार इंटरपोल के जरिए पर्पल नोटिस जारी किया है। यह नोटिस इंटरनेशनल लेवल पर मनी लॉन्ड्रिंग के नए और शातिर तरीकों को उजागर करने के लिए जारी किया गया है, जिसे वैश्विक स्तर पर अपराध से लड़ने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। ईडी की जांच में एक ऐसा मोडस ओपेरंडी सामने आया है, जिसमें देशी और विदेशी शैल कंपनियों का इस्तेमाल कर इंटरनेशनल ट्रेड के नाम पर बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही थी।
फर्जीवाड़े के इस धंधे में कई तरकीबें अपनाई गईं, जैसे आयात में कम कीमत (अंडर-इनवॉइसिंग) दिखाना, सेमीकंडक्टर्स जैसे सामानों के लिए फर्जी ड्यूटी-फ्री आयात करना, नकली दस्तावेज तैयार करना और तीसरे देशों के जरिए सर्कुलर री-एक्सपोर्ट करना। इन तमाम हथकंडों से ऐसा माहौल बनाया जाता था कि सब कुछ वैध इंटरनेशनल ट्रेड जैसा लगे, जबकि हकीकत में यह अवैध पैसे को सफेद करने का खेल था।
ईडी के मुताबिक, यह सिस्टम बाहर से देखने में वैध व्यापार जैसा लगता था, लेकिन असल में यह हवाला सिस्टम की तरह काम करता था। फर्क सिर्फ इतना था कि इसमें फॉर्मल बैंकिंग चैनल और जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जाता था ताकि रेगुलेटरी एजेंसियों की नजर से बचा जा सके। इस तरह की चालाकी से अपराधी बड़े पैमाने पर काले धन को वैध दिखाने में कामयाब हो रहे थे।
इंटरपोल के 8 खास नोटिसों में से एक, पर्पल नोटिस का मकसद 196 देशों की जांच एजेंसियों को अपराधियों के नए तौर-तरीकों, उनकी चालबाजियों और छुपाने के ढंगों के बारे में आगाह करना है। ईडी ने बताया कि इस तरह के नोटिस ग्लोबल एजेंसियों को जागरूक करने और उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के नए ट्रेंड्स से सावधान करने के लिए बेहद जरूरी हैं। ED लंबे समय से अलग-अलग देशों और इंटरनेशनल ग्रुप्स के साथ अनौपचारिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रही है ताकि समय पर सही जानकारी मिल सके और जांच को तेज किया जा सके।
पर्पल नोटिस के जरिए ईडी ने न सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग के इस नए तरीके को बेनकाब किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर जांच एजेंसियों को एकजुट करने की दिशा में भी कदम उठाया है। यह नोटिस दुनिया भर की एजेंसियों को इस शातिराना तरीके के बारे में सतर्क करेगा और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर नकेल कसने में मदद करेगा। ईडी का यह कदम न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ लड़ाई को और मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।