नई दिल्ली : सिंधु जल संधि (IWT) से जुड़े गैरकानूनी मध्यस्थता कोर्ट (COA) ने भारत को धोखा दिया है। 2025 में पहलगाम हमले के बाद से न्यूट्रल एक्सपर्ट ने इस कोर्ट से सांठगांठ करके यह ओछी हरकत की है। न्यूट्रल एक्सपर्ट ने पाकिस्तान को गुपचुप तरीके से किशनगंगा और रैटल प्रोजेक्ट्स से जुड़े भारत के गोपनीय तकनीकी दस्तावेजों को पाकिस्तान को शेयर कर दिया है। वहीं, भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़ी इस अवैध कोर्ट की सभी कार्यवाहियों का बहिष्कार कर दिया है। बीते साल अप्रैल में पहलगाम हमले के बाद भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था।
पाकिस्तान की ओर से मिला था आवेदन : द इकोनॉमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, भारत-पाकिस्तान को दी गई सूचना में न्यूट्रल एक्सपर्ट माइकल लिनो के दफ्तर ने कहा कि 11 फरवरी को पाकिस्तान की ओर से एक आवेदन मिला था, जिसमें भारत की ओर से सौंपे गए कुछ दस्तावेजों का खुलासा करने को कहा गया है। नीदरलैंड की राजधानी हेग स्थित इस मध्यस्थता अदालत के न्यूट्रल एक्सपर्ट को भारत ने ये दस्तावेज दिए थे।
पाकिस्तान को भारत के मिल गए गोपनीय दस्तावेज : पाकिस्तान अब भारत के 31 जुलाई, 2024 के मध्यस्थता कोर्ट को सौंपे गए किशनगंगा प्रोजेक्ट के डेटा को हासिल कर सकेगा। इसमें सबसे लेटेस्ट रैटल हाइडल प्रोजेक्ट से जुड़े 21 जनवरी, 2025 के आंकड़े हैं। पाकिस्तान बगलिहार जलाशय के 2015 के बाथिमेट्रिक सर्वेक्षण के आंकड़ों को भी आयोग के समक्ष पेश कर सकेगा।
भारत ने इस कदम को सांठगांठ करने वाला बताया : भारत को इस मामले में 20 फरवरी तक का समय दिया गया था, मगर उसने इस पर अपनी कोई स्थिति नहीं बताई। अचानक भारत ने ऐसे दस्तावेजों का प्रकाशन करने पर आपत्ति जताई। भारत ने यह साफ किया है कि ऐसे किसी गोपनीय दस्तावेज का खुलासा करना अवैध रूप से गठित मध्यस्थता कोर्ट से सांठगांठ करने जैसा होगा।
मध्यस्थता कोर्ट ने पाकिस्तान के मन की बात कही थी : भारत ने इस कोर्ट की कार्यवाहियों को 2023 से खारिज करता आया है और इसे गैरकानूनी बताता रहा है। इस कोर्ट ने बीते साल जून में ही खुद यह घोषित कर दिया था कि वह विवादित मामलों को सुनने का हकदार है। कोर्ट ने कहा था कि सिंधु जल संधि को एकतरफा निलंबित नहीं किया जा सकता है। यहां तक कि भारत ने इसकी कार्यवाहियों को दरकिनार कर दिया था।
मई में हो सकती है आखिरी सुनवाई : न्यूट्रल एक्सपर्ट का यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह तब आया है, जब कोर्ट का आखिरी फैसला इसी साल मई के मध्य में आने वाला है। बीते हफ्ते ही मध्यस्थता कोर्ट ने मौखिक सुनवाई की थी, जिसमें भारत ने हिस्सा नहीं लिया था।
