नई दिल्ली : बांग्लादेश में हालात दिन-ब-दिन नाजुक होते जा रहे हैं.वहां भारत विरोधी माहौल तेज हो गया है, कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो चुके हैं. ऐसे में भारत सरकार ने सख्त लेकिन समझदारी वाला फैसला लिया है. भारतीय राजनयिकों और अधिकारियों के परिवारों को वापस भारत आने की सलाह दी गई है. मीडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, “सुरक्षा स्थिति को देखते हुए, सावधानी के तौर पर हमने मिशन और पोस्ट के अधिकारियों के आश्रितों (dependents) को भारत लौटने की सलाह दी है. बांग्लादेश में हमारा मिशन और सभी पोस्ट पूरी तरह खुले हैं और सामान्य रूप से काम कर रहे हैं.”
फरवरी में होने वाला है चुनाव, बढ़ती हिंसा : दरअसल, बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक उथल-पुथल चल रही है. अंतरिम सरकार के तहत चुनाव की तैयारी हो रही है, फरवरी में संसदीय चुनाव होने वाले हैं. इस दौरान अल्पसंख्यकों पर हमले, विरोध प्रदर्शन और भारत विरोधी माहौल बढ़ा है. कुछ नेता भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर टिप्पणियां कर रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया. पिछले महीने चटगांव में भारतीय मिशन के बाहर हिंसक प्रदर्शन भी हुए थे. सरकार का यह कदम पूरी तरह सावधानी का है. सूत्रों का कहना है कि यह फैसला “अभी के लिए” लिया गया है और स्थिति सामान्य होने पर दोबारा देखा जाएगा. बांग्लादेश को फिलहाल “नॉन-फैमिली पोस्टिंग” घोषित कर दिया गया है, यानी परिवार के साथ पोस्टिंग नहीं की जा रही. तुलना के लिए देखें तो अफगानिस्तान में भारतीय अधिकारियों की पोस्टिंग नॉन-फैमिली ही रहती है. पाकिस्तान में परिवार जा सकते हैं, लेकिन पेशावर स्कूल हमले के बाद सरकार ने बच्चों को लोकल स्कूलों में न भेजने की सलाह दी थी.
क्या भारतीय दूतावास बंद हो रहे हैं? : इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि क्या बांग्लादेश में भारतीय दूतावास बंद किए जा रहे हैं? जवाब है नहीं. सूत्रों के मुताबिक, भारतीय मिशन और सभी पोस्ट पूरी तरह खुले हैं और सामान्य रूप से काम कर रहे हैं. यह सलाह सिर्फ परिवारों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर दी गई है.
कहां से शुरू हुआ तनाव? : दरअसल, दिसंबर 2025 में बांग्लादेश में इस्लामवादी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद हालात तेजी से बिगड़े. हत्या के बाद अफवाहें फैलीं कि हमलावर भारत भाग गए हैं. हालांकि बाद में आरोपियों में से एक ने वीडियो जारी कर दावा किया कि वह किसी खाड़ी देश में है, लेकिन तब तक माहौल काफी तनावपूर्ण हो चुका था. इसी के बाद भारतीय मिशनों की सुरक्षा को लेकर खतरे बढ़ने लगे.
अल्पसंख्यकों को लेकर भारत की चिंता : भारत लंबे समय से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता जताता रहा है. अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन और छात्रों के आंदोलन के बाद बनी मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान यह चिंता और गहरी हो गई. 9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश सरकार से साफ शब्दों में कहा था कि वह सांप्रदायिक घटनाओं से सख्ती से निपटे. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था, “हम अल्पसंख्यकों और उनके घर-दुकानों पर बार-बार हो रहे हमलों का परेशान करने वाला पैटर्न देख रहे हैं.”
हिंसा के डरावने आंकड़े : बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल के अनुसार, दिसंबर 2025 में ही सांप्रदायिक हिंसा के 51 मामले दर्ज हुए, जिनमें 10 लोगों की हत्या हुई. दिसंबर के बाद से अब तक हिंदू समुदाय के कम से कम सात लोगों की जान जा चुकी है.
यूनुस सरकार की रिपोर्ट क्या कहती है? : हाल ही में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने 2025 की कानून-व्यवस्था को लेकर एक आधिकारिक रिपोर्ट साझा की. पुलिस रिकॉर्ड की इस समीक्षा के मुताबिक, पूरे साल में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े 645 मामले दर्ज हुए. इनमें 71 घटनाओं को सांप्रदायिक माना गया, जबकि बाकी को गैर-सांप्रदायिक बताया गया.
