भारत-यूएई के रिश्तों को मिली मजबूती, वैश्विक मुद्दों पर चर्चा; कई समझौतों व घोषणाओं पर सहमति 

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नई दिल्ली : संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार (19 जनवरी) को संक्षिप्त दौर पर भारत आए। इस दौरान भारत और यूएई के रिश्तों को और मजबूती आई। पीएम मोदी प्रोटोकॉल तोड़ एयरपोर्ट पर खुद उनको रिसीव करने पहुंचे। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे को गले लगाया और फिर एक ही कार में सवार होकर एयरपोर्ट से रवाना हुए। इसके बाद लोक कल्याण मार्ग में अहम बैठक हुई। यहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय समेत कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा और कई समझौतों व घोषणाओं पर सहमति जताई। साढ़े तीन घंटे के प्रवास के बाद यूएई के राष्ट्रपति रवाना हो गए। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एयरपोर्ट पर अल नाहयान को विदा किया।

भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी को और गहराई देने के लिए कई अहम लेटर ऑफ इंटेंट यानी आशय पत्र (Lols), मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoUs), समझौते और घोषणाएं की गईं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि दोनों देशों ने आर्थिक, तकनीकी, परमाणु, सांस्कृतिक और युवा सहयोग जैसे क्षेत्रों में ठोस रोडमैप तय किया।

रणनीतिक रक्षा साझेदार पर भी बनी बात, असैन्य परमाणु सहयोग को देंगे बढ़ावा : व्यापार के मोर्चे पर 2022 में दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता पर हस्ताक्षर होने के बाद से द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर को पार कर गया है। इसे देखते हुए, दोनों नेताओं ने लक्ष्य को बढ़ाने और 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर करने का फैसला किया। 2023-24 में दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 84 अरब डॉलर था। यह भी तय किया गया कि एमएसएमई उद्योगों के निर्यात को पश्चिम एशियाई, अफ्रीकी और यूरेशियाई क्षेत्रों में आसान बनाया जाएगा।

रणनीतिक रक्षा साझेदारी बढ़ाएंगे : दोनों पक्षों ने अपने रक्षा संबंधों का भी काफी विस्तार करने का संकल्प लिया। दोनों देशों के बीच एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने के लिए दोनों पक्षों के बीच एक आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।

0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी की होगी आपूर्ति : दोनों पक्षों के बीच सालाना 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की आपूर्ति के लिए एक दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। 10 साल के लिए यह समझौता हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और अबू धाबी की सरकारी तेल कंपनी गैस (एडीएनओसी गैस) के बीच हुआ। यूएई कतर के बाद भारत को एलएनजी का दूसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

असैन्य परमाणु सहयोग बढ़ाएंगे : इसके अलावा दोनों देश द्विपक्षीय असैन्य परमाणु सहयोग को बढ़ावा देने पर भी राजी हुए। इसमें बड़े परमाणु रिएक्टरों और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों का विकास, साथ ही उन्नत रिएक्टर प्रणालियों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन में सहयोग शामिल है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में कई नए और उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें भारत में शांति अधिनियम पारित होने के आलोक में नागरिक परमाणु सहयोग के नए अवसर शामिल हैं।

सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर की होगी स्थापना : विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। यूएई की साझेदारी से भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने पर सहयोग करने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि खाड़ी देश भारत में डाटा सेंटर क्षमताओं के विस्तार के लिए निवेश पर भी विचार करेगा।

धोलेरा का करेगा विकास : गुजरात के धोलेरा में एक विशेष निवेश क्षेत्र के विकास में यूएई की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए एक अलग आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, एक पायलट प्रशिक्षण स्कूल, एक एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सुविधा, एक ग्रीनफील्ड बंदरगाह, एक स्मार्ट शहरी टाउनशिप, साथ ही रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा बुनियादी ढांचे से संबंधित परियोजनाओं की स्थापना पर विचार किया जाएगा।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भी बढ़ाएंगे सहयोग : अंतरिक्ष बुनियादी ढांचे के विकास में संयुक्त कार्य के लिए एक और आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। यह करार भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएन-स्पेस) और यूएई की अंतरिक्ष एजेंसी के बीच हुआ। विदेश सचिव ने कहा कि इस पहल के तहत, दोनों पक्ष नए लॉन्च कॉम्प्लेक्स, सैटेलाइट फैब्रिकेशन सुविधाएं, संयुक्त मिशन, स्पेस अकादमी और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने पर विचार करेंगे।

खाद्य सुरक्षा पर एमओयू : खाद्य सुरक्षा एवं तकनीकी आवश्यकताओं पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, और संयुक्त अरब अमीरात के जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण मंत्रालय के बीच। यह खाद्य क्षेत्र में सहयोग प्रदान करेगा और भारत से यूएई को खाद्य उत्पादों और अन्य कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करेगा। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि इससे भारत के किसानों को फायदा होगा और यूएई में खाद्य सुरक्षा में योगदान मिलेगा।

यूएई कंपनियों के कार्यालयों की स्थापना : यूएई की कंपनियों के कार्यालयों और संचालन की स्थापना, फर्स्ट अबू धाबी बैंक (एफएबी) और डीपी वर्ल्ड का गिफ्ट सिटी, गुजरात में संचालन।

डाटा दूतावास स्थापित करने पर विचार : मिस्री ने कहा कि दोनों पक्ष डाटा दूतावास स्थापित करने की संभावना का भी पता लगाएंगे। यह एक अपेक्षाकृत नई अवधारणा है, लेकिन यह देखने के लिए काम किया जाएगा कि इन्हें पारस्परिक रूप से मान्यता प्राप्त संप्रभुता समझौतों के तहत कैसे स्थापित किया जा सकता है।

हाउस ऑफ इंडिया की स्थापना होगी : अबू धाबी में हाउस ऑफ इंडिया की स्थापना (एक सांस्कृतिक स्थल, जिसमें अन्य के साथ-साथ भारतीय कला, विरासत और पुरातत्व का संग्रहालय शामिल होगा) की जाएगी। घोषणा में युवा आदान-प्रदान को बढ़ावा देना भी शामिल है।

एलएनजी करार 3 अरब डॉलर का : भारत और यूएई के बीच एलएनजी करार 3 अरब डॉलर का है। एडीएनओसी ने कहा कि वह हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को 10 साल तक सालाना 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति करेगी। इस समझौते से भारत के साथ उसके अनुबंधों का कुल मूल्य 20 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। कंपनी ने कहा कि भारत अब यूएई का सबसे बड़ा ग्राहक है और एडीएनओसी गैस की एलएनजी रणनीति का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यूएई संग रणनीतिक रक्षा साझेदारी काफी अहम : भारत और यूएई के बीच हुई रणनीतिक रक्षा साझेदारी को काफी अहम माना जा रहा है। भारत के कट्टर दुश्मन पाकिस्तान ने पिछले साल सऊदी अरब के साथ एक आपसी रक्षा समझौता किया था। साथ ही पिछले हफ्ते एक पाकिस्तानी मंत्री ने पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते का मसौदा तैयार करने की घोषणा की थी। हालांकि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि यूएई के साथ आशय पत्र पर हस्ताक्षर करने का मतलब यह नहीं है कि भारत क्षेत्रीय संघर्षों में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में किसी देश के साथ रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर हमारी भागीदारी का अर्थ यह नहीं है कि हम इस क्षेत्र के संघर्षों में शामिल होंगे।

पीएम ने की मेहमान नवाजी… पारंपरिक तोहफे दिए : पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति नाहयान और उनके परिवार की लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर मेहमान नवाजी की। इस दौरान पीएम ने नाहयान को शाही नक्काशीदार लकड़ी का झूला दिया। गुजराती संस्कृति में झूला पीढ़ियों के बीच एकजुटता व जुड़ाव का प्रतीक है। साथ ही, पीएम मोदी ने नाहयान को तेलंगाना में बने चांदी के बॉक्स में कश्मीर की पश्मीना शॉल भी तोहफे में दी।

राष्ट्रपति की मां को पश्मीना शॉल और केसर का तोहफा : पीएम ने राष्ट्रपति की मां एचए शेख फातिमा बिन्त मुबारक अल केतबी को भी सजे हुए चांदी के बॉक्स में पश्मीना शॉल तोहफे में दी। उन्हें सजी हुई चांदी की डिब्बी में कश्मीरी केसर भी तोहफे में दिया गया।