पटना : प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। डीआईजी रैंक के अधिकारी शिवेंद्र प्रियदर्शी की ₹1.52 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को जब्त किया है। जब्त की गई संपत्ति में नगदी, गहना, बैंक बैलेंस, दो फ्लैट और फिक्स्ड डिपॉजिट समेत कई कागजात बरामद किए गए। प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि शिवेंद्र प्रियदर्शी ने डीआईजी के पद पर रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी व अपनी पत्नी के नाम पर लगभग 1.52 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की।
इस मामले की जांच सबसे पहले विशेष निगरानी इकाई ने शुरू की थी। फरवरी 2017 में मामला दर्ज होने के बाद मई 2017 में चार्जशीट दायर किया गया। इसी चार्जशीट को आधार बनाकर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत फिर नए सिरे से जांच शुरू की। ईडी ने शिवेंद्र प्रियदर्शी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 और भ्रष्टाचार निवारण (PC) अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच में यह सामने आया कि शिवेंद्र प्रियदर्शी, जो उस समय बिहार सरकार के जेल और सुधार सेवाओं के डीआईजी थे। इस दौरान वह सासाराम, बेनीपुर, गोपालगंज, सिवान और पटना समेत कई अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहे। उन्होंने जून 1993 से मई 2017 के बीच अवैध तरीके से यह अकूत संपत्ति अर्जित की, जिसका मूल्य ₹1,52,47,491 से अधिक आंका गया है।
ईडी का यह भी कहना है कि डीआईजी ने आय के ज्ञात स्रोतों से बहुत अधिक कमाई की थी। इस अवैध कमाई का कुछ हिस्सा सीधे उनके परिवार के बैंक खातों में जमा किया गया था, जबकि कुछ पैसा रिश्तेदारों की मदद से जमा किया गया। जांच एजेंसी ने यह भी पाया कि काफी कमाई ‘तोहफों’ के रूप में भी हुई। अब विशेष निगरानी इकाई इस पूरे मामले की जांच कर रही है।
