रांची : झारखंड में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मंगलवार 27 जनवरी को नगर निकाय चुनाव की घोषणा हो गई। चुनाव की घोषणा होते ही शहरी राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों में 23 फरवरी को होने वाले चुनाव में कुल 43 लाख 33 हजार 574 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 22 लाख 7 हजार 203 पुरुष, 21 लाख 26 हजार 227 महिलाएं और 144 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। हालांकि इस बार चुनाव मेयर प्रत्याशी अपने चुनाव प्रचार में बंपर पैसा नहीं उड़ा पाएंगे। निर्वाचन आयोग ने प्रचार की लिमिट तय कर दी है।
48 निकायों में होगा मतदान, 1087 वार्ड पार्षदों का होगा चुनाव : राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता 9 नगर निगमों में मेयर, 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के अलावा कुल 1087 वार्ड पार्षदों के लिए वोट डालेंगे। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।
4304 मतदान केंद्र, 2129 भवनों में होगी वोटिंग : झारखंड राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने बताया कि निकाय चुनाव के लिए राज्यभर में 4,304 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। ये मतदान केंद्र 2,129 भवनों में स्थापित किए जाएंगे, ताकि मतदाताओं को मतदान में किसी तरह की परेशानी न हो।
2020 से लंबित थे चुनाव, अब पूरी होगी प्रक्रिया : गौरतलब है कि झारखंड में नगर निकाय चुनाव वर्ष 2020 से लंबित थे। कोरोना महामारी के चलते चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। इसके बाद विभिन्न कानूनी और प्रक्रियात्मक कारणों से चुनाव बार-बार टलते रहे। अब राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रक्रिया को अंतिम रूप देते हुए चुनाव कराने का फैसला लिया है।
मेयर प्रत्याशियों पर खर्च की सीमा तय : चुनाव की घोषणा के साथ ही आयोग ने उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सीमा भी तय कर दी है। 10 लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगर निगमों में मेयर या अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अधिकतम 25 लाख रुपये, जबकि वार्ड पार्षद 5 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। 10 लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में यह सीमा मेयर/अध्यक्ष के लिए 15 लाख रुपये और वार्ड पार्षद के लिए 3 लाख रुपये तय की गई है।
नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए अलग सीमा : एक लाख या उससे अधिक आबादी वाली नगर परिषदों में अध्यक्ष 10 लाख रुपये और वार्ड पार्षद 2 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। एक लाख से कम आबादी वाली नगर परिषदों में यह सीमा क्रमशः 6 लाख रुपये और 1.5 लाख रुपये होगी। वहीं 12 हजार से अधिक और 40 हजार से कम आबादी वाली नगर पंचायतों में अध्यक्ष के लिए 5 लाख रुपये और वार्ड पार्षद के लिए 1 लाख रुपये खर्च सीमा निर्धारित की गई है।
