रांची : झारखंड में ‘स्थानीय स्वशासन’ के भविष्य का फैसला आज होने जा रहा है। राज्य के 48 नगर निकायों, जिनमें रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं, वहां मतदान की गिनती आज सुबह 8 बजे से कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू होने वाली है। राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी 1,309 मतगणना टेबलों पर पारदर्शी प्रक्रिया का दावा किया है। बैलेट पेपर (मतपत्र) से चुनाव हुए हैं, जिसके कारण नतीजों की घोषणा में समय लग सकता है। ये चुनाव न केवल स्थानीय विकास बल्कि सत्ताधारी इंडिया गठबंधन और विपक्षी भाजपा के जनाधार की अग्निपरीक्षा भी माना जा रहा है।
सुबह 8 बजे से शुरू होगी मतों की गिनती : झारखंड के सभी मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, प्रत्याशियों की संख्या के आधार पर गणना एक से नौ राउंड तक चलेगी। रांची नगर निगम में सबसे अधिक 225 टेबल लगाए गए हैं, जहां पांच राउंड में गिनती पूरी होने की उम्मीद है। प्रशासन ने कहा है कि बैलेट पेपर की वजह से प्रक्रिया लंबी खींच सकती है।
बैलेट पेपर से चुनाव में ‘नोटा’ का अभाव : अबकी बार झारखंड नगर निकाय चुनाव में निर्वाचन आयोग ने एक बड़ा बदलाव करते हुए मतदान मतपत्रों (बैलेट पेपर) के जरिए कराया। दिलचस्प बात ये रही कि मतपत्रों पर ‘नोटा’ (None of the Above) का विकल्प मौजूद नहीं था, यानी मतदाताओं को मैदान में मौजूद उम्मीदवारों में से ही किसी एक को चुनना अनिवार्य था।
गैर-दलीय चुनाव में दलों की प्रतिष्ठा दांव पर : तकनीकी रूप से झारखंड नगर निकाय चुनाव गैर-दलीय आधार पर लड़ा गया और उम्मीदवारों को व्यक्तिगत चुनाव चिह्न दिए गए। हालांकि, वास्तविकता में भाजपा, झामुमो और कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों ने अपने समर्थित उम्मीदवारों के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया है। धनबाद जैसे क्षेत्रों में तो सत्ताधारी गठबंधन के घटक दल (झामुमो, कांग्रेस, आरजेडी) ही एक-दूसरे के सामने मजबूती से डटे नजर आए।
आरक्षण के नए समीकरण वाला भी दांव : झारखंड के इतिहास में पहली बार नगर निकाय चुनाव में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), महिलाओं और पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए विस्तृत आरक्षण व्यवस्था लागू की गई। इस नई व्यवस्था के कारण कई नए चेहरों को चुनावी राजनीति में आने का मौका मिला है, जिससे सामाजिक समीकरणों के बदलने की पूरी संभावना है।
2018 के मुकाबले मतदान प्रतिशत में मामूली गिरावट : झारखंड नगर निकाय चुनाव में कुल 63.05 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। ये आंकड़ा वर्ष 2018 में हुए पिछले निकाय चुनाव (64.66%) की तुलना में थोड़ा कम है। हालांकि, मतदान केंद्रों पर महिलाओं और युवाओं का उत्साह काफी देखा गया था, जो अब परिणामों में तब्दील होने वाला है।
भाजपा के 2018 के दमदार प्रदर्शन की चुनौती : झारखंड नगर निकाय के पिछले चुनाव (2018) में जब दलीय आधार पर वोटिंग हुई थी, तब भाजपा ने 34 में से 21 निकायों पर जीत हासिल कर अपना दबदबा बनाया था। रांची, हजारीबाग और मेदिनीनगर जैसे प्रमुख निगमों पर भाजपा का कब्जा था। इस बार बिना पार्टी सिंबल के चुनाव होने के बावजूद भाजपा अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश में है, जबकि सत्ताधारी गठबंधन इसे चुनौती दे रहा है।
- झारखंड के 9 नगर निगमों में कौन होगा मेयर? : झारखंड में कुल 9 नगर निगम है, जिनमें आज नगर काउंटिंग होनी है। मतगणना को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
- रांची नगर निगम
- धनबाद नगर निगम
- जमशेदपुर नगर निगम
- चास नगर निगम (बोकारो)
- देवघर नगर निगम
- हजारीबाग नगर निगम
- गिरिडीह नगर निगम
- आदित्यपुर नगर निगम (सरायकेला-खरसावां)
- मेदिनीनगर नगर निगम (पलामू)
