झारखंड से दिल्ली तक तोते की तस्करी का खेल, 600 से ज्यादा तोते जब्त

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रांची : झारखंड राज्य हाल के दिनों में अवैध वन्यजीव व्यापार, विशेष रूप से तोते की तस्करी का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। राज्य की घनी जंगलों और सीमावर्ती इलाकों की वजह से तस्करों को आसानी हो रही है।

पिछले एक सप्ताह में दो बड़े मामले सामने आए हैं, जिसमें सैकड़ों संरक्षित तोतों को जब्त किया गया है। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से इन मामलों का खुलासा हुआ, जो राज्य में बढ़ते वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

250 से अधिक संरक्षित प्रजाति तोते पाए गए : पहला मामला 5 जनवरी को रांची के बाहरी इलाके में सामने आया। वन विभाग की टीम ने एक सूचना के आधार पर एक ट्रक को रोका, जिसमें 250 से अधिक एलेक्जेंड्राइन तोते (एक संरक्षित प्रजाति) पाए गए।

जांच में पता चला कि ये तोते राज्य की जंगलों से पकड़े गए थे और इन्हें दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश के बाजारों में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था।

छोटे-छोटे पिंजरों में ठूंसकर रखे गए : प्रत्येक तोते की बाजार कीमत 5,000 से 10,000 रुपये तक आंकी गई है। वन अधिकारी के अनुसार, यह तस्करी का एक संगठित गिरोह है, जो स्थानीय ग्रामीणों को इस्तेमाल कर जंगलों से पक्षियों को पकड़ता है। ये तोते छोटे-छोटे पिंजरों में ठूंसकर रखे गए थे और इनकी हालत बेहद खराब थी। ट्रक चालक और उसके साथी, जो झारखंड के हजारीबाग जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं, को गिरफ्तार किया गया।

350 दुर्लभ प्रजातियों के तोते बरामद : दूसरा मामला और भी बड़ा था, जो 9 जनवरी को जमशेदपुर के पास सरायकेला-खरसावां जिले में उजागर हुआ। यहां पुलिस ने एक गोदाम पर छापा मारा और 350 दुर्लभ प्रजातियों के तोते बरामद किए।

इनमें रिंग-नेक्ड पैराकीटऔर अन्य विदेशी प्रजातियां शामिल थीं, जो संभवतः बांग्लादेश या नेपाल से तस्करी कर लाई गई थीं। गोदाम के मालिक समेत तीन लोगों को हिरासत में लिया गया। जांच से पता चला कि ये तोते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स औरपेट शॉप्स के माध्यम से बेचे जाने वाले थे।

राज्य की सीमाओं के करीब होने के कारण झारखंड तस्करी का हॉटस्पॉट बन रहा है, जहां से पक्षी अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, तोते की तस्करी न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि पक्षियों की प्रजातियों को खतरे में डालती है। झारखंड में पिछले साल से ऐसे मामलों में 30% की वृद्धि दर्ज की गई है।

वन विभाग को सख्त निर्देश : राज्य सरकार ने इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए वन विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं। डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी को अलर्ट जारी किया है और सीमावर्ती इलाकों में चेकिंग बढ़ाने के आदेश दिए हैं।

इन मामलों में वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत केस दर्ज किए गए हैं, जिसमें दोषियों को 3 से 7 साल की सजा और जुर्माना हो सकता है।

बरामद तोतों को वन विभाग के रेस्क्यू सेंटर में रखा गया है, जहां उनकी देखभाल की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे नेटवर्क पर लगाम नहीं लगाई गई, तो राज्य की जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ेगा।

तोतों की तस्करी के मुख्य कारण : तोते और अन्य पक्षियों की तस्करी दुनिया भर में एक बड़ा अवैध कारोबार बन चुका है। इसके पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारण छिपे हुए हैं।

  1. पालतू जानवरों का बाजार : दुनिया भर में तोतों की मांग उनके आकर्षक रंगों और इंसानी आवाजों की नकल करने की क्षमता के कारण बहुत अधिक है।

तस्कर इन्हें प्राकृतिक जंगलों से पकड़कर शहरों के अवैध बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचते हैं। लोग इन्हें स्टेटस सिंबल या अकेलेपन को दूर करने वाले साथी के रूप में पालना चाहते हैं।

  1. अंधविश्वास और ज्योतिष : भारत जैसे देशों में तोतों का उपयोग भविष्य बताने के लिए किया जाता है। ज्योतिषी इन्हें छोटे पिंजरों में रखते हैं और कार्ड निकलवाकर लोगों का भाग्य बताते हैं।

इसके अलावा कुछ विशेष प्रजातियों का उपयोग तांत्रिक क्रियाओं और टोटकों में भी किया जाता है, जिसके कारण इनकी तस्करी बढ़ जाती है।

  1. दुर्लभ पंखों की मांग : कुछ पहाड़ी और विदेशी तोतों के पंख बहुत महंगे होते हैं। इनका इस्तेमाल फैशन इंडस्ट्री, सजावटी सामान और विशेष प्रकार की कलाकृतियां बनाने में किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में दुर्लभ पक्षियों के अंगों और पंखों की भारी कीमत मिलती है।
  2. अवैध ब्रीडिंग का व्यापार : जंगलों से पकड़े गए तोतों को अक्सर बड़े ब्रीडर्स को बेच दिया जाता है। वे इन पक्षियों से अवैध तरीके से अंडे और बच्चे पैदा करवाते हैं ताकि उन्हें बिना किसी कानूनी दस्तावेज के बाजार में बेचा जा सके।

तस्करी के दौरान होने वाले निर्दयता : तस्करी के दौरान इन बेजुबान पक्षियों के साथ बेहद क्रूर व्यवहार किया जाता है। इन्हें बहुत छोटे पिंजरों या पाइपों में ठूंसकर रखा जाता है ताकि पकड़े जाने का डर कम रहे।

इस प्रक्रिया में दम घुटने, प्यास और तनाव के कारण आधे से ज्यादा पक्षी रास्ते में ही मर जाते हैं। तस्कर इन्हें उड़ने से रोकने के लिए अक्सर इनके पंखों को बेरहमी से काट देते हैं या टेप से चिपका देते हैं।

भारत में कानून : भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत भारतीय तोतों को पकड़ना, बेचना या घर में पालना एक गंभीर अपराध है। ऐसा करने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।