रांची/धनबाद : झारखंड में धनबाद जिले के भागा बांध में पुलिस और प्रिंस खान के गुर्गों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार अपराधी अमन सिंह उर्फ मनीष उर्फ कुबेर ने प्रिंस खान के कई राज पुलिस के समक्ष खोले हैं। दोनों ने पुलिस को जो कुछ बताया है, उसने झारखंड पुलिस की चिंता बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार पूछताछ में इन दोनों ने पुलिस को बताया है कि प्रिंस खान फिलहाल अपना नाम बदलकर फैज के नाम से पाकिस्तान के बहावलपुर में शरण ले रखा है। उसे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का समर्थन प्राप्त है।
पुलिस को प्रिंस खान का एक आईडी कार्ड भी मिला : कुबेर के मोबाइल से पुलिस को प्रिंस खान का एक आईडी कार्ड भी मिला है। जिसमे पाकिस्तान नेशनल आईडी कार्ड में प्रिंस ने अपना नाम बदलकर फैज खान रखा है। आईडी कार्ड में बहावलपुर का एड्रेस दर्ज है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान का बहावलपुर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ माना जाता है। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि प्रिंस खान को पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद का समर्थन मिल चुका है। रंगदारी का पैसा आतंकी के पास भी प्रिंस पहुंचा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
प्रिंस के पास पहुंचता है प्रतिमाह एक करोड़ : पुलिस के समक्ष कुबेर ने स्वीकार किया है कि गैंग का सरगना प्रिंस खान के पास प्रत्येक महीना एक करोड़ रुपया भेजा जाता है। गिरोह के सदस्य क्रिप्टोकरेंसी से यह पैसा प्रिंस के खाते में भेजता है। पुलिस जांच में वैसे 65 बैंक खातों का ट्रांजेक्शन मिला है जिसके माध्यम से प्रिंस खान को पैसा भेजा जाता था। इनमें कई खातों से जेल में बंद सुजीत सिन्हा के रिश्तेदार को भी पैसा ट्रांसफर किया गया है। इन संदिग्ध खाताधारकों के बारे में फिलहाल पुलिस जानकारी जुटाकर पूछताछ करने का प्रयास कर रही है।
कुबेर रखता है ट्रांजेक्शन का हिसाब : पलामू स्थित चैनपुर निवासी अमन सिंह उर्फ कुबेर दोनों गिरोह के बीच में कड़ी का काम कर रहा था। सुजीत सिन्हा के कहने पर कुबेर ही राज्य के अलग-अलग जिला में रहने वाले सक्रिय सदस्यों की मदद से कारोबारी का पूरा डिटेल के अलावा मोबाइल नंबर मंगाता था और प्रिंस खान को उपलब्ध कराता था। इसके बाद धमकी भरे मैसेज का स्क्रिप्ट भी कुबेर ही तैयार करता था। प्रिंस खान का धमकी भरे लहजे में ऑडियो रिकॉर्ड कर कुबेर ही एडिट करते हुए फाइनल करता था। जिसके बाद उसे कारोबारी के पास भेजा जाता था।
रंगदारी से मिले पैसे का ट्रांजेक्शन कहां और कितना हुआ है, इसकी पूरी जानकारी कुबेर ही रखता था। सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान के बीच वह मीडिएटर का काम करता था। वासेपुर का फहीम खान के साले टुन्ना खान का बेटा अफजल अमन भी शूटर को हथियार उपलब्ध कराता था।
गिरोह ने धनबाद और बोकारो के रांची में जमाया प्रभाव : पुलिस पूछताछ में कुबेर ने स्वीकार किया है कि वह पैसे की लेन-देन का हिसाब रखता था। कुबेर ने यह भी बताया है कि धनबाद और बोकारो के बाद राजधानी रांची में भी गिरोह ने अपना प्रभाव जमा लिया था। रांची में गिरोह का पूरा काम नामकुम निवासी कौशल पांडे और लालपुर स्थित नगड़ा टोली में रहने वाला राणा राहुल सिंह देखता है। कुबेर ने यह भी बताया है कि शहर के प्रतिष्ठित कारोबारियों की जानकारी जुटाकर प्रिंस खान को उसका नाम और नंबर उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी कौशल के पास है जबकि रंगदारी का पैसा नहीं मिलने पर हथियार और शूटर उपलब्ध कराने का जिम्मा लालपुर का सफेदपोश राणा को दिया गया है।
दोनों सदस्य पहले सुजीत सिन्हा के लिए भी काम करता था। दोनों ने अपने-अपने जिम्मेवारी का निर्वहन करते हुए प्रिंस खान के लिए कई काम भी किया है। पुलिस ने अब इन दोनों की तलाश शुरू कर दी है। इन दोनों के खिलाफ साक्ष्य जुटाकर गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
