झारखंड : ED की ग्रामीण विकास विभाग में कार्रवाई तेज, ‘टेंडर कमीशन घोटाले’ में इंजीनियरों को नोटिस

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रांची : झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में फैले ‘टेंडर कमीशन घोटाले’ की जड़ों तक पहुंचने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार के इस संगठित ढांचे का खुलासा करने के लिए विभाग के करीब 12 इंजीनियरों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है। इन इंजीनियरों में कार्यपालक अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE) और कनीय अभियंता (JE) स्तर के अधिकारी शामिल हैं। ED ने सभी को अलग-अलग तिथियों पर रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया है।

विभाग के अंदर भ्रष्टाचार का सिंडिकेट : ईडी की अब तक की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि ग्रामीण विकास विभाग के भीतर भ्रष्टाचार का एक गहरा सिंडिकेट काम कर रहा था। जांच एजेंसी को पुख्ता जानकारी मिली है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान ठेकेदारों से मोटी रकम वसूली जाती थी और फिर उस पैसे को ऊपर बैठे बड़े अफसरों और रसूखदारों तक पहुंचाया जाता था। इसमें कौन लोग शामिल थे? किसे कितना पैसा मिलता था? ईडी अब इस मामले में तथ्य हासिल करना चाहती है। ताकि मामले में शामिल लोगों के खिलाफ आगे की जांच पूरी कर कार्रवाई की जा सके।

अब तक 22 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल : ग्रामीण विकास विभाग में मनी लॉन्ड्रिंग के इस बड़े खेल में ED अब तक चार चरणों में 22 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (आरोप पत्र) दायर कर चुकी है। इस मामले के मुख्य आरोपियों में आलमगीर आलम (तत्कालीन मंत्री), संजीव कुमार (मंत्री के तत्कालीन आप्त सचिव), बीरेंद्र राम (मुख्य अभियंता), आलोक रंजन और अन्य शामिल हैं।

37 करोड़ का कैश जब्त किया गया था : इस मामले में पहले की गयी तलाशी में सिंडिकेट से जुड़े 37 करोड़ रुपये से अधिक नकद जब्त हुई थी। इस अवैध नकदी की बाद में चार्टर्ड अकाउंटेंट और एंट्री ऑपरेटरों के दिल्ली स्थित नेटवर्क के माध्यम से लॉन्ड्रिंग की गई। इसका कई उच्च- मूल्य वाली संपत्तियों को खरीदने के लिए इस्तेमाल हुआ था।