महाशिवरात्रि@2026 : आज शिव-पार्वती का दिव्य मिलन… अग्निलिंग के उदय से सृष्टि का आरंभ

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नई दिल्ली : महाशिवरात्रि का पर्व आज 15 फरवरी 2026, रविवार को मनाया जा रहा है। यह शिव और पार्वती के दिव्य मिलन का दिन है, जिसके खास अवसर पर देशभर के शिवालयों में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन व दान-दक्षिणा जैसे पुण्य कार्य किए जाते हैं।

महाशिवरात्रि भारतीयों का एक प्रमुख त्यौहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। माघ फागुन फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारम्भ इसी दिन से हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ।

इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव व पत्नी पार्वती की पूजा होती हैं। यह पूजा व्रत रखने के दौरान की जाती है। साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत सहित पूरी दुनिया में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है|

समुद्र मंथन : समुद्र मंथन अमृत का उत्पादन करने के लिए निश्चित था, लेकिन इसके साथ ही हलाहल नामक विष भी पैदा हुआ था। हलाहल विष में ब्रह्माण्ड को नष्ट करने की क्षमता थी और इसलिए केवल भगवान शिव इसे नष्ट कर सकते थे। भगवान शिव ने हलाहल नामक विष को अपने कंठ में रख लिया था। जहर इतना शक्तिशाली था कि भगवान शिव अत्यधिक दर्द से पीड़ित हो उठे थे और उनका गला नीला हो गया था। इस कारण से भगवान शिव ‘नीलकंठ’ के नाम से प्रसिद्ध हैं।

उपचार के लिए, चिकित्सकों ने देवताओं को भगवान शिव को रात भर जगाये रहने की सलाह दी। इस प्रकार, भगवान शिव के चिंतन में एक सतर्कता रखी। शिव को आनंदित करने और जागाये रखने के लिए, देवताओं ने अलग-अलग नृत्य और संगीत बजाये। जैसे सुबह हुई, उनकी भक्ति से प्रसन्न भगवान शिव ने उन सभी को आशीर्वाद दिया। शिवरात्रि इस घटना का उत्सव है, जिससे शिव ने दुनिया को बचाया। तब से इस दिन, भक्त उपवास करते है।

महाशिवरात्रि 2026 शुभ तिथि : इस वर्ष 15 फरवरी को महाशिवरात्रि है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 05 बजकर 04 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी की शाम 05 बजकर 34 मिनट तक चलेगी।

अनुष्ठान : गेंदे के फूलों की अनेक प्रकार की माला शिव को चढ़ाई जाती हैं। इस अवसर पर भगवान शिव का अभिषेक अनेकों प्रकार से किया जाता है। जलाभिषेक-जल से और दुग्धाभिषेक-दूध से। सुबह-सुबह भगवान शिव के मंदिरों पर भक्तों, जवान और बूढ़ों का तांता लग जाता है। सभी पारम्परिक शिवलिंग पूजा करने के लिए जाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं। भक्त सूर्योदय के समय पवित्र स्थानों पर स्नान करते हैं जैसे गंगा, या (खजुराहो के शिव सागर में) या किसी अन्य पवित्र जल स्रोत में। यह शुद्धि के अनुष्ठान हैं, जो सभी हिन्दू त्योहारों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पवित्र स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहने जाते हैं, भक्त शिवलिंग स्नान करने के लिए मंदिर में पानी का बर्तन ले जाते हैं महिलाओं और पुरुषों दोनों सूर्य, विष्णु और शिव की प्रार्थना करते हैं मंदिरों में घंटी और “शंकर जी की जय” ध्वनि गूंजती है। भक्त शिवलिंग की आधी परिक्रमा करते हैं और फिर शिवलिंग पर पानी या दूध भी चढ़ाते हैं।

महाशिवरात्रि पूजा में छह वस्तुओं को अवश्य शामिल करना चाहिए :

  • शिव लिंग का पानी, दूध और शहद के साथ अभिषेक। बेर या बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं
  • फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि को दर्शाते हैं
  • जलती धूप, धन, उपज (अनाज)
  • दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है
  • और बेलपत्र जो सांसारिक सुखों के साथ संतोष अंकन करते हैं।

ज्योतिर्लिंग : बारह ज्योतिर्लिंग (प्रकाश के लिंग) जो पूजा के लिए भगवान शिव के पवित्र धार्मिक स्थल और केन्द्र हैं। वे स्वयम्भू के रूप में जाने जाते हैं, जिसका अर्थ है “स्वयं उत्पन्न”। बारह स्‍थानों पर बारह ज्योतिर्लिंग स्‍थापित हैं।

  • सोमनाथ यह शिवलिंग गुजरात के काठियावाड़ में स्थापित है।
  • श्री शैल मल्लिकार्जुन मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर स्थापित है श्री शैल मल्लिकार्जुन शिवलिंग
  • महाकाल उज्जैन के अवंति नगर में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग, जहां शिवजी ने दैत्यों का नाश किया था।
  • ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से खुश होकर वरदान देने हुए यहां प्रकट हुए थे शिवजी। जहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हो गया।
  • नागेश्वर गुजरात के द्वारका धाम के निकट स्थापित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग।
  • बैजनाथ झारखंड के बैद्यनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग।
  • भीमाशंकर महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे स्थापित भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग।
  • त्र्यंबकेश्वर नासिक (महाराष्ट्र) से 25 किलोमीटर दूर त्र्यंबकेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग।
  • घृष्णेश्वर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के समीप वेसल गांव में स्थापित घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग।
  • केदारनाथ हिमालय का दुर्गम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग। हरिद्वार से 150 पर मिल दूरी पर स्थित है।
  • काशी विश्वनाथ बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग।
  • रामेश्वरम त्रिचनापल्ली (मद्रास) समुद्र तट पर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग।