NASA : आर्टेमिस 2 मिशन के चारों क्रू सदस्य सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे, प्रशांत महासागर में उतरा ओरियन यान

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नई दिल्ली/वॉशिंगटन : नासा के मून मिशन आर्टेमिस 2 के चारों क्रू सदस्य सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आए हैं। मिशन का अंतरिक्ष यान ओरियोन 10 दिन के सफल मिशन के बाद आज प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरा। अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर ओरियन यान स्थानीय समय अनुसार रात 8.07 बजे और भारतीय समय के अनुसार, 11 अप्रैल की सुबह 5.37 बजे प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरा। आर्टेमिस 2 कैलिफोर्निया के प्रशांत महासागर में सैन डिएगो तट के पास उतरने का नेटफ्लिक्स और नासा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया गया।

अंतरिक्ष यात्रियों ने तय की अब तक की सबसे लंबी दूरी : इससे पहले नासा ने अपने संदेश में कहा था कि वे अंतरिक्ष यात्रियों का फिर से पृथ्वी पर स्वागत करने का इंतजार कर रहे हैं। यह मिशन पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ था, क्योंकि यह पांच दशकों से भी ज्यादा समय के बाद पृथ्वी की निचली कक्षा से परे गहरे अंतरिक्ष की खोज में मानवता की वापसी का प्रतीक है। नासा के अनुसार, इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने अब तक की सबसे लंबी दूरी तय की है, जो भविष्य में चंद्रमा पर जाने वाले अभियानों के लिए रास्ता तैयार करेगा।

मिशन के चार सदस्यों वाले दल में कौन शामिल थे? : मिशन के दौरान पहले, चार सदस्यों वाले दल ने पृथ्वी से 248,655 मील की यात्रा करके एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इस दल में रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल रहे। अपनी यात्रा के सबसे दूर के बिंदु पर वे लगभग 252,756 मील तक पहुंचे। यह उपलब्धि पहले अपोलो-13 मिशन के रिकॉर्ड से भी आगे निकल गई है।

भविष्य के मिशन में काम आएगा शोध : अधिकारियों के अनुसार, यह 10 दिन का मिशन स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान की गहरे अंतरिक्ष में क्षमता को परखने के लिए बनाया गया है। इसमें चंद्रमा के पास से गुजरना भी शामिल था, जो भविष्य के मिशनों के लिए बहुत जरूरी कदम है।

नासा की अधिकारी डॉ. लोरी ग्लेज ने कहा कि यह सफलता दिखाती है कि एजेंसी लगातार नई सीमाओं को पार करने और अंतरिक्ष में नई खोज करने के लिए प्रतिबद्ध है। ओरियन अंतरिक्ष यान से जेरेमी हैनसन ने कहा कि यह उपलब्धि पुराने अंतरिक्ष यात्रियों की विरासत को सम्मान देती है और साथ ही अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए दौर की शुरुआत भी करती है। आर्टेमिस-II मिशन को नासा के उस बड़े लक्ष्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है, जिसमें चंद्रमा पर लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी स्थापित करना शामिल है।