झारखंड : रांची में रसोइया-संयोजिका और सेविका का आंदोलन, CM आवास के पहले रोके गए प्रदर्शनकारी

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रांची : झारखंड प्रदेश विद्यालय रसोइया, संयोजिका और सेविका संघ अपनी लंबित मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहा है। इसी क्रम में रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में आंदोलनरत महिलाएं झामुमो विधायक कल्पना सोरेन से मिलने और अपनी समस्याएं बताने के लिए रांची के कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास की ओर जा रही थीं। प्रदर्शनकारी महिलाएं अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपने की तैयारी में थीं।

मोरहाबादी मैदान के पास प्रशासन ने रोका काफिला : प्रदर्शनकारी महिलाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने उन्हें मोरहाबादी मैदान के पास ही रोक दिया। इस दौरान महिलाओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन के दौरान रसोइया संघ की प्रदेश कोषाध्यक्ष अनीता देवी केशरी गिर गईं, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट लग गई और सिर फट गया। मौके पर मौजूद अन्य महिलाओं ने उन्हें संभाला और प्राथमिक उपचार के लिए भेजा गया।

संघ ने वर्षों से सेवा देने वाली महिलाओं की स्थिति बताई : अनीता देवी केशरी ने बताया कि वर्ष 2004 से सरकारी और अल्पसंख्यक विद्यालयों में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग की गरीब महिलाएं रसोइया, संयोजिका और अध्यक्ष के रूप में काम कर रही हैं। कई महिलाओं ने विद्यालयों में सेवा करते हुए अपने जीवन के 20 से अधिक वर्ष बिताए हैं। उन्होंने बताया कि संयोजिका का कार्य बच्चों की उपस्थिति के आधार पर बाजार से सामग्री लाना, चावल का वितरण करना और रजिस्टर का संधारण करना होता है, जबकि अध्यक्ष विद्यालय की समस्याओं की निगरानी और समाधान का कार्य करती हैं।

मानदेय को लेकर जताई नाराजगी : संघ के अनुसार संयोजिका और अध्यक्ष को अब तक किसी प्रकार का मानदेय नहीं दिया गया है। उन्होंने बताया कि संगठन ने वर्ष 2005 से लगातार आंदोलन कर सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। वर्ष 2010 में रसोइयों को 10 माह के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया गया था। इसके बाद 2015 में 500 रुपये और 2021 में 500 रुपये की वृद्धि की गई। वर्ष 2024 में मानदेय बढ़ाकर 1000 रुपये किया गया और इसे 12 माह के लिए लागू किया गया। इसके बावजूद वर्तमान में रसोइयों को औसतन लगभग 100 रुपये प्रतिदिन ही मिलते हैं।

सरकार से कई मांगों को लेकर आंदोलन जारी : संघ ने सरकार से रसोइया और संयोजिकाओं के लिए न्यूनतम वेतन लागू करने की मांग की है। इसके अलावा संयोजिका और अध्यक्ष को भी मानदेय देने, बीमा और पेंशन की व्यवस्था करने, एप्रन-कैप और साल में दो साड़ी उपलब्ध कराने तथा मृत या घायल कर्मियों के परिजनों को मुआवजा और नौकरी देने की मांग भी उठाई गई है। संगठन का कहना है कि इन मांगों को लेकर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।