पटना : रोहतास के तत्कालीन डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (डीएफओ) प्रद्युम्न गौरव के मनमाने कामों से हाई कोर्ट हैरान हो गया। प्रद्युम्न गौरव ने एक दर्जन ट्रांसपोर्टरों की रिट याचिकाएं हाई कोर्ट में होने के बावजूद उनके जब्त भारी वाहनों की नीलामी के आदेश दिए थे। अब पटना हाई कोर्ट ने राज्य के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) को दोषी अधिकारी प्रद्युम्न गौरव को आरा (भोजपुर) में उनके पद से हटाने और उनका ट्रांसफर हेडक्वार्टर करने का आदेश दिया है। ये आदेश जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने दिया है।
यह मामला दीपक कुमार सिंह और 17 अन्य वाहन मालिकों की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा है। आरोप है कि जब प्रदुम्न गौरव रोहतास के डीएफओ थे, तब उन्होंने एक दर्जन से अधिक ट्रांसपोर्टरों के भारी वाहनों को जब्त कर उन्हें नीलाम करने का आदेश जारी कर दिया था। खास बात यह है कि यह कार्रवाई तब की गई जब वाहन मालिकों की याचिकाएं हाई कोर्ट में लंबित थीं और उन पर सुनवाई चल रही थी।
जस्टिस संदीप कुमार ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, ‘भोजपुर के डीएफओ प्रद्युम्न गौरव के कामों से एक बहुत ही परेशान करने वाला ट्रेंड सामने आता है, जिन्होंने रोहतास जिले में उसी पद पर रहते हुए, पहली नजर में मनमाने ढंग से और बिना सोचे-समझे काम किया। जब याचिकाकर्ताओं ने प्रद्युम्न को बताया कि उनकी रिट याचिकाएं इस कोर्ट में पेंडिंग हैं, तो उन्होंने कोर्ट को बिना बताए, जल्दबाजी में जब्त वाहनों की नीलामी करवा दी। इस कोर्ट का मानना है कि ऐसे अधिकारी को डीएफओ आरा जैसे ज़िम्मेदार पद पर नहीं रहना चाहिए और उनका ट्रांसफर हेडक्वार्टर कर देना चाहिए, ताकि इस राज्य के लोगों को और परेशानी न हो।’
18 याचिकाकर्ताओं में से एक संतोष कुमार ने शिकायत की कि, झारखंड राज्य सरकार की ओर से उनके ट्रक के लिए जारी इंटर-स्टेट परमिट दिखाने के बावजूद, डीएफओ प्रद्युम्न गौरव ने अवैध रूप से उसे जब्त कर लिया, जबकि वह पत्थर की चिप्स से लदा हुआ था।
मंगलवार को जब इस मामले पर फिर से सुनवाई हुई तो राज्य सरकार के वकील अनंत प्रसाद सिंह ने जस्टिस कुमार को बताया कि सरकार ने डीएफओ के ट्रांसफर के सोमवार के आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के सामने एक इंट्रा-कोर्ट अपील दायर की है। इस मामले की सुनवाई सिंगल बेंच की ओर से 27 जनवरी को फिर से की जाएगी।
