झारखंड : रजरप्पा मंदिर में पिटाई मामले में हुई कार्रवाई, 4 पुलिसकर्मी निलंबित; ईटखोरी CO पर भी हो एक्शन

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रांची : झारखंड में इन दिनों पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। रामगढ़ जिले के रजरप्पा मंदिर में चार-पांच पुलिसकर्मियों की ओर से श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया गया। वहीं चतरा जिले के इटखोरी में सीओ की ओर से एक व्यक्ति पर लाठी चलाने का वीडियो वायरल हो रहा है। इन दोनों मामले में विपक्षी दलों की ओर से कार्रवाई की मांग की गई है।

श्रद्धालु की पिटाई मामले में 4 पुलिसकर्मी निलंबित : रजरप्पा मंदिर में कथित तौर पर एक श्रद्धालु की पिटाई करते हुए दिखाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। यह घटना रविवार को मंदिर के निकास द्वार के पास हुई। वीडियो में चार. पांच पुलिसकर्मी एक श्रद्धालु की कथित तौर पर पिटाई करते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि NewsXpoz ऑनलाइन की ओर से इस वीडियो की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं की जाती है।

जांच के बाद एसपी की ओर से की गई कार्रवाई : इसी बीच रामगढ़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अजय कुमार ने मामले का संज्ञान लेते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। एसपी ने कहा, ‘रजरप्पा मंदिर में ड्यूटी पर तैनात झारखंड आर्म्ड पुलिस (जेएपी) के चार कांस्टेबल को डीएसपी-सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी चंदन कुमार वत्स के नेतृत्व में हुई जांच में दोषी पाए जाने के बाद निलंबित कर दिया गया है। जांच के दौरान, वत्स ने चारों कांस्टेबल को दोषी पाया और अपनी रिपोर्ट जिला पुलिस मुख्यालय को सौंप दी।

अजय कुमार ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर हमने कांस्टेबल श्यामलाल महतो, राधे श्याम कुमार, बहादुर ओरांव और जॉनसन सुरिन को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के आदेश दिए हैं।

कतार में खड़े बिना मंदिर में प्रवेश करने से मामला बिगड़ा : मंदिर के वरिष्ठ पुजारी अजय पांडा ने बताया कि सप्ताहांत के कारण रविवार को सुबह से ही काफी भीड़ थी। बताया जाता है कि जमशेदपुर से आए एक श्रद्धालु ने कतार में खड़े हुए बिना निकास द्वार से मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद पुलिसकर्मियों के साथ झड़प हो गई।

महिला सीओ ने युवक के सिर पर डंडे से प्रहार किया : उधर, चतरा जिले में पुलिस की मौजूदगी में एक महिला सीओ की ओर से युवकों के सिर पर डंडे से प्रहार करने का मामला सामने आया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि चतरा की घटना बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रशासनिक पद पर बैठे किसी भी अधिकारी से संयम, संवेदनशीलता और कानून सम्मत आचरण की अपेक्षा की जाती है। कानून लागू कराने का दायित्व जिनके कंधों पर है, यदि वही कानून हाथ में लेने लगें तो यह व्यवस्था की मूल भावना पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

बीच सड़क पर प्रताड़ित करना न्यायसंगत नहीं : बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यदि संबंधित युवकों से कोई गलती हुई भी थी, तो उसके लिए विधि सम्मत कार्रवाई के प्रावधान मौजूद हैं। बीच सड़क इस प्रकार सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित करना न तो न्यायसंगत है और न ही यह प्रशासनिक मर्यादा के अनुरूप है। ऐसी घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और प्रशासन की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं।

उन्होंने चतरा के उपायुक्त से ईटखोरी की सीओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित करें और प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।