रांची : असम में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष हेमंत सोरेन की सक्रियता ने पूर्वोत्तर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। इसी क्रम में गुरुवार को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवास में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने उनसे मुलाकात की। इस बैठक को असम चुनाव के संदर्भ में विपक्षी दलों के संभावित तालमेल और रणनीतिक समन्वय की दिशा में अहम माना जा रहा है।
हेमंत सोरेन ने कई सीटों पर उम्मीदवार उतारने का दिया संकेत : झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रमुख हेमंत सोरेन ने असम विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर उम्मीदवार उतारने का संकेत दिया है। इसे लेकर वो पिछले एक महीने में दो बार असम का दौरा कर चुके हैं। हेमंत सोरेन असम में रहने वाले जनजातीय और चाय बागान में मजदूरी करने वाले झारखंड के आदिवासी वोट बैंक की मदद से संगठन का विस्तार करना चाहते हैं।
हिमंता बिस्वा सरमा सरकार को घेरने की कोशिश : हेमंत सोरेन ने वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान ही यह ऐलान किया था कि वो असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को भी चुनाव के वक्त जवाब देंगे। उस दौरान हे हिमंता बिस्वा सरमा भाजपा और एनडीए प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कई दिनों तक झारखंड में ही कैंप कर रहे थे। साथ ही हेमंत सोरेन सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे थे। अब हेमंत सोरेन असम जाकर वहां बीजेपी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।
असम चुनाव को लेकर विपक्ष की रणनीति पर चर्चा : असम में जेएमएम के बढ़ते प्रभाव के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह और झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के. राजू के साथ गौरव गगोई रांची पहुंचे। आधिकारिक तौर पर इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे असम चुनाव को लेकर विपक्षी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
झामुमो और कांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे पर प्रारंभिक बातचीत : सूत्रों के अनुसार बैठक में आगामी असम विधानसभा चुनाव, झारखंड में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही असम में झामुमो और कांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे और चुनावी तालमेल को लेकर भी प्रारंभिक बातचीत की चर्चा है।
एक नए समीकरण की संभावनाओं को बल : दरअसल, पिछले लगभग डेढ़ महीने के भीतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम में दो बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया है। फरवरी में तिनसुकिया जिले में आयोजित आदिवासी महासभा की रैली और इसके बाद विश्वनाथ जिले में हुई सभा में उमड़ी भीड़ ने वहां की राजनीति में एक नए समीकरण की संभावनाओं को बल दिया है।
चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी समुदाय की आवाज : इन सभाओं में उन्होंने खास तौर पर चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी समुदाय की पहचान, सम्मान और अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। झामुमो का मानना है कि असम में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जाकर बसे लाखों आदिवासी समुदाय राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण शक्ति हैं, जिनकी आवाज अभी तक मुख्यधारा की राजनीति में अपेक्षित रूप से नहीं उठाई गई है। इसी सामाजिक आधार पर पार्टी वहां अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है।
झामुमो की नजर देश की 12 करोड़ आदिवासी वोट बैंक पर : झामुमो के महासचिव और राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार का कहना है कि पार्टी का लक्ष्य देश के लगभग 12 करोड़ आदिवासियों की मजबूत आवाज बनना है। उनके अनुसार असम में मिल रहे जनसमर्थन से यह संकेत मिलता है कि वहां के आदिवासी समाज में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई उम्मीदें पैदा हो रही हैं। इस बीच रांची पहुंचने पर मीडिया से बातचीत में गौरव गोगोई ने बताया कि कांग्रेस नेतृत्व ने असम विधानसभा चुनाव के लिए झारखंड कांग्रेस नेता बंधु तिर्की को वरीय पर्यवेक्षक बनाया है।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर भाजपा को चुनौती देने की रणनीति तैयार की जा रही है और इसी सिलसिले में झारखंड के नेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। बहरहाल, रांची में कांग्रेस नेताओं और हेमंत सोरेन की यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार से आगे बढ़कर असम चुनाव की संभावित रणनीति के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी जा रही है।
