हजारीबाग : झारखंड सरकार में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर पर गुरुवार को बुलडोजर चलाया गया। हजारीबाग में एनटीपीसी के चट्टी बरियातू कोल माइंस के सामने जोरदाग झुमरी टांड में स्थित योगेंद्र साव और अन्य भू रैयतों के घर को बुलडोजर चला कर तोड़ दिया गया। अपने इस घर का निर्माण 2011 में योगेंद्र साव ने किया था।
खनन क्षेत्र वाले इलाके में बना था मकान : योगेंद्र साव और अन्य रैयतों का मकान खनन क्षेत्र वाले इलाके में बना था। इस जमीन को कोयला खनन के लिए चिह्नित किया गया था। जिसके कारण काफी दिनों से योगेंद्र साव और अन्य भू रैयतों को घर खाली करने के लिए कहा जा रहा था। गुरुवार को एनटीपीसी और पुलिस की मौजूदगी में घरों को बुलडोजर चला कर तोड़ दिया गया।
बड़ी संख्या में पुलिस बल की गई थी तैनाती : बुलडोजर चलाने की कार्रवाई को लेकर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इस कार्रवाई को लेकर पिछले कुछ दिनों के तनाव का माहौल था। यह भी आरोप लगाया गया था कि योगेंद्र साव की ओर से पहाड़ पर चढ़ कर तीन-धनुष से एनटीपीसी के अधिकारियों पर हमला किया गया था। जिसके बाद के कंपनी का रवैया सख्त हो गया था और कड़ी सुरक्षा के बीच बुलडोजर चलाने की कार्रवाई हुई।
बुलडोजर चलने के वक्त पूर्व विधायक निर्मला देवी घर थी मौजूद : अपने घर पर बुलडोजर चलने के बाद योगेंद्र साव के बाद एनटीपीसी के साथ साथ राज्य सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनका घर तोड़ा गया उस समय पूर्व विधायक निर्मला देवी उस घर में मौजूद थीं। बिना मुआवजा दिये और बिना समय दिये ही उनके घर को तोड़ दिया गया है।
योगेंद्र साव ने कहा कि वो इस समय बड़कागांव में मौजूद नहीं है कहीं बाहर है। उन्हें पता चला है कि भारी पुलिस बल के साथ उनके घर को तोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा वर्तमान सरकार को उठाना पड़ेगा।
घर तोड़े जाने से भू रैयतों में नाराजगी : पूर्व मंत्री और अन्य रैयतों का घर तोड़े जाने पर रैयतों में काफी नाराजगी है। स्थानीय लोगों ने बताया कि झारखंड सरकार की ओर से जितने भी बोलेरो पुलिस को रक्षा के लिए दिया गया है, इस वाहन का उपयोग भी एनटीपीसी कंपनी को सहयोग करने और घरों को तोड़ने में लगाया गया। स्थानीय रैयतों का आरोप है कि एनटीपीसी की ओर से किसानों और भू रैयतों का शोषण किया जा रहा है। कंपनी की ओर से बिना बसाए भू रैयतों को बेघर किया जा रहा है। इनके लिए स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र, सामुदायिक भवन, श्मशान घाट, सड़क और पानी की व्यवस्था नहीं की गई।
