भारत ने हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल का किया सफल परीक्षण, स्वदेशी डिफेंस इनोवेशन में बड़ी उपलब्धि

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नई दिल्ली : भारत ने ओडिशा तट पर लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल ( LR-AShM ) का सफल टेस्ट किया है। DRDO की बनाई इस मिसाइल ने 1,500 km की रेंज में तय टारगेट पर सटीक निशाना लगाया, जो समुद्र में देश की सुरक्षा बढ़ाने में एक बड़ा मील का पत्थर है। मिसाइल को Mach 5 से ज्यादा स्पीड वाले टारगेट को हिट करने के लिए डिजाइन किया गया है। (यह Mach 10 की स्पीड तक पहुंच सकती है।

DRDO ने जारी नहीं किया ऑफिशियल बयान : इस टेस्ट ने इसके एडवांस्ड टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम की सटीकता को साबित कर दिया। इसने लॉन्च से लेकर आखिरी असर तक मिशन के सभी लक्ष्यों को पूरा किया, जिसमें बीच रास्ते में किए गए दांव-पेच और लगातार तेज रफ्तार से उड़ान भरना भी शामिल था। हालांकि DRDO ने अभी तक कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया है, लेकिन BJP ने X पर इस टेस्ट का एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसके साथ लिखा है कि भारत की हाइपरसोनिक बढ़त अब और भी तेज हो गई है। ओडिशा के तट पर DRDO का LR-AShM Phase-II टेस्ट एक नए युग की शुरुआत का संकेत है। आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार भारत के लिए PM मोदी के विजन को दिखाते हुए, यह स्वदेशी रक्षा इनोवेशन में एक जबरदस्त छलांग है।

क्या है LR-AShM मिसाइल की खासियत :

  • LR-AShM एक स्वदेशी दो-चरणों वाला सॉलिड-प्रोपेल हाइपरसोनिक ग्लाइड हथियार है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया है।
  • यह अपनी तरह का पहला और एक शक्तिशाली हथियार है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की एंटी-एक्सेस/एरिया-डिनायल (A2/AD) क्षमताओं को बढ़ाता है।
  • यह मिसाइल हाइपरसोनिक रेंज में काम करती है। इसकी गति Mach 10 से शुरू होती है और अपनी उड़ान के दौरान यह औसतन Mach 5.0 की गति बनाए रखती है।
  • यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो कम ऊंचाई पर, कई बार उछलते हुए (skips) एक अर्ध-बैलिस्टिक (quasi-ballistic) मार्ग का अनुसरण करती है, जिससे यह अपनी उड़ान के अधिकांश समय तक रडार की पकड़ से बची रहती है।
  • यह अपने अंतिम चरण (terminal phase) में अत्यधिक सटीकता सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित सेंसर का उपयोग करते हुए, स्थिर और गतिशील दोनों तरह के लक्ष्यों (जैसे कि विमान वाहक पोत) को निशाना बना सकती है।
  • यह मिसाइल उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसे DRDO की एडवांस्ड सिस्टम्स लेबोरेटरी (ASL) और अलग-अलग औद्योगिक भागीदारों द्वारा विकसित किया गया है।