नई दिल्ली/काठमांडू : नेपाल में जनरेशन Z विरोध प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. दोनों नेताओं की गिरफ्तारी के बाद देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. पुलिस ने शनिवार सुबह ओली को भक्तपुर के गुंडू स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया, जबकि रमेश लेखक को सूर्यबिनायक स्थित उनके घर से तड़के करीब 5 बजे गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई पहले से जारी जांच के तहत जारी वारंट के आधार पर की गई.
किस मामले में हुई कार्रवाई? : यह गिरफ्तारी सितंबर, 2025 में हुए जनरेशन Z विरोध प्रदर्शनों के दौरान दमन और आपराधिक लापरवाही के आरोपों से जुड़ी है. पुलिस ने इस मामले में गैर इरादतन हत्या (कुलपेबल होमिसाइड) के तहत केस दर्ज किया है. पूर्व विशेष न्यायालय के न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ओली, लेखक और कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी.
आयोग ने राष्ट्रीय दंड संहिता की धाराओं 181 और 182 के तहत आपराधिक लापरवाही का मामला चलाने की बात कही है, जिसमें 10 साल तक की सजा का प्रावधान है. रिपोर्ट में तत्कालीन गृह सचिव, सशस्त्र पुलिस बल के प्रमुख, राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख और काठमांडू के मुख्य जिला अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है.
खुफिया चेतावनियों की अनदेखी का आरोप : आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध प्रदर्शनों के दौरान संभावित हिंसा को लेकर पहले से खुफिया जानकारी मौजूद थी, लेकिन उस पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई. इस लापरवाही के चलते हालात बिगड़े और बड़े पैमाने पर हिंसा हुई.
युवाओं के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों में कुल 77 लोगों की मौत हुई, जबकि सरकारी और निजी संपत्तियों को अरबों रुपये का नुकसान पहुंचा. ओली की गिरफ्तारी से पहले और बाद में काठमांडू घाटी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई. इस ऑपरेशन के लिए भक्तपुर जिला पुलिस और काठमांडू पुलिस की विशेष टीमों को तैनात किया गया था.
कैबिनेट की मंजूरी के बाद कार्रवाई : प्रधानमंत्री बालेन शाह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला लिया गया, जिसके बाद यह कार्रवाई संभव हो सकी. गृह मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी देर रात तक बैठक कर गिरफ्तारी की रणनीति तय की थी.
