पाकिस्तान : अभी भी चल रही PAK में आतंक की फैक्ट्री… 15 आतंकी समूहों को सुरक्षित पनाह-अमेरिकी रिपोर्ट

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नई दिल्ली : पाकिस्तान भले ही दुनिया के सामने खुद को साफ छवि वाला देश बताने का ढोंग कर रहा हो लेकिन अब एक अमेरिकी रिपोर्ट ने उसकी पोल खोलकर रख दी है। अमेरिकी कांग्रेस अनुसंधान सेवा (सीआरएस) की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अभी भी आतंक की फैक्ट्री चला रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में अभी भी 15 प्रमुख आतंकी समूहों को सुरक्षित पनाह मिली हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दशकों से राज्य-नेतृत्व वाले सैन्य अभियानों और रणनीतिक नीतिगत बदलावों के बावजूद पाकिस्तान विभिन्न प्रकार के आतंकवादी समूहों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है।

5 अलग-अलग टारगेट पर कर रहे काम : रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014 के नेशनल एक्शन प्लान में सभी सशस्त्र मिलिशियाओं को खत्म करने का आदेश होने के बावजूद, 15 प्रमुख समूह 5 अलग-अलग टारगेट पर काम करना जारी रखे हुए हैं। इन आतंकियों में ग्लोबल टेररिस्ट, अफगानिस्तान के खिलाफ हमला बोलने वाले, भारत और कश्मीर पर हमला बोलने वाले और घरेलू स्तर के समूह शामिल हैं।

12 आतंकी समूह को अमेरिका FTO घोषित किए हुए है : इन 15 समूहों में से 12 को तो अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया गया है, जिनमें से अधिकांश चरमपंथी विचारधारा से प्रेरित हैं। रिपोर्ट इन नेटवर्कों को खत्म करने में हुई मूलभूत विफलता को रेखांकित करती है, और बताती है कि अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी संगठन पाकिस्तानी धरती पर खुलेआम सक्रिय हैं।

रिपोर्ट में विशेष रूप से हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मुहम्मद जैसे भारत-केंद्रित समूहों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिनके क्रमशः 1,500 और 500 सशस्त्र समर्थकों के सक्रिय कैडर मौजूद हैं।

अमेरिकी रिपोर्ट की प्रमुख बातें :

  • क्षेत्रीय स्तर पर, पाकिस्तान लश्कर-ए-तैबा (2008 के मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार), जैश और हिजबुल जैसे भारत समर्थक समूहों का अड्डा बना हुआ है, जो कश्मीर के विलय की मांग करते हैं।
  • इस्लामाबाद भारत पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादियों को समर्थन देने का आरोप लगाता है – जिसे भारत नकारता है।
  • वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने अफगानिस्तान के गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी के नेतृत्व वाले हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों से जोड़ा है।
  • 2022 में FATF की “ग्रे लिस्ट” से हटाए जाने के बावजूद, पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता के लिए “विशेष चिंता का देश” घोषित किया गया है, क्योंकि कुछ मदरसे अभी भी ऐसे सिद्धांतों का शिक्षण करते हैं जो चरमपंथी विचारधारा की स्वीकार्यता को बढ़ा सकते हैं।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि निष्क्रिय शिया विरोधी सिपाही-ए-सहबा से लेकर सक्रिय लश्कर-ए-झांगवी और भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा तक, इन संगठनों की विविधता एक बहुआयामी सुरक्षा चुनौती को दर्शाती है जिसे न तो हवाई हमले और न ही राजनयिक दांव-पेच हल कर पाए हैं।