नई दिल्ली : जब पूरी दुनिया की नजर यूएस-इजरायल और ईरान जंग पर टिकी हुई है, तब भारत खामोशी के साथ अपनी ताकत को बढ़ाने में लगा है. भारत ने सोमवार को वो परमाणु तकनीक हासिल कर ली, जो मुट्ठी भर देशों के पास ही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद यह बड़ी खुशखबरी देशवासियों को दी. दरअसल भारत का पहला स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) कल्पक्कम में सफलतापूर्वक चालू हो गया. पीएम मोदी ने पोस्ट करके इसे भारत की न्यूक्लियर ऊर्जा यात्रा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह रिएक्टर खुद से ज्यादा ईंधन बना सकता है, जो दुनिया में बहुत कम देश कर पाते हैं.
पूरे देश के लिए गर्व का क्षण- पीएम मोदी : पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, ‘आज भारत अपनी सिविल न्यूक्लियर यात्रा में एक बड़ा कदम उठा रहा है. कल्पक्कम का यह स्वदेशी रिएक्टर क्रिटिकल हो गया है. यह हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की गहराई और इंजीनियरिंग की ताकत को दिखाता है. थोरियम के भंडार का फायदा उठाने की दिशा में यह निर्णायक कदम है. पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है. भारत के लिए यह एक गौरवपूर्ण क्षण है। हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को हार्दिक बधाई.’
बताते चलें कि यह रिएक्टर कल्पक्कम (तमिलनाडु) में बना है. यह पूरी तरह से भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों द्वारा डिजाइन किया गया और बनाया गया है. इसमें 200 से ज्यादा भारतीय कंपनियों का योगदान है, जिसमें छोटी-बड़ी कई लघु औद्योगिक इकाइयां भी शामिल हैं.
ईंधन जलाते हुए पैदा करता है नया ईंधन : आमतौर पर न्यूक्लियर रिएक्टर में ईंधन जलता है, जिससे बिजली बनती है. इस प्रक्रिया में ईंधन खत्म हो जाता है. लेकिन यह फास्ट ब्रीडर रिएक्टर खास है. यह ईंधन जलाते हुए नया ईंधन भी पैदा करता है. इसलिए इसे ‘ब्रीडर’ कहते हैं.
वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह उपलब्धि भारत के तीन चरणों वाले न्यूक्लियर प्रोग्राम का दूसरा चरण शुरू करने जैसी है. इसके तीसरे चरण में भारत अपने विशाल थोरियम भंडार का इस्तेमाल करके बहुत सस्ती और स्वच्छ बिजली बना सकेगा. दुनिया में सबसे ज्यादा थोरियम का भंडार भारत के पास है.
इमरजेंसी में खुद बंद हो जाएगा रिएक्टर : साइंटिस्टों का कहना है कि एक बार यह रिएक्टर पूरी तरह चालू हो गया तो भारत रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा, जिसके पास कमर्शियल स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चल रहा होगा. यह रिएक्टर सुरक्षा के लिहाज से भी बहुत आधुनिक है. इसमें पैसिव सेफ्टी फीचर्स हैं, यानी कोई इमरजेंसी हो तो रिएक्टर खुद-ब-खुद सुरक्षित तरीके से बंद हो सकता है.
अगर सहज शब्दों में कहा जाए तो भारत की यह उपलब्धि देश को सस्ती, स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा की ओर ले जाने वाला मील का पत्थर साबित होगी. इससे देश की बड़ी आबादी की बिजली की जरूरतें पूरा हो पाएंगी. साथ ही कोयले की वजह से होने वाले प्रदूषण से भी लोगों को राहत मिलेगी.
