बिहार : गयाजी के श्री विष्णुपद मंदिर में 15 साल बाद महायज्ञ, 501 भव्य कलश यात्रा से गूंजा विष्णुपद परिसर

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गयाजी : बिहार के गयाजी स्थित श्री विष्णुपद मंदिर परिसर में विश्व शांति और लोक कल्याण की कामना के साथ शनिवार से श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का भव्य आयोजन शुरू हो गया है। करीब 15 वर्षों के बाद आयोजित इस महायज्ञ को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है, वहीं प्रशासन ने भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

15 वर्षों बाद हो रहा भव्य आयोजन : गयाजी के विश्व प्रसिद्ध श्री विष्णुपद मंदिर परिसर में आयोजित यह महायज्ञ 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रहा है। इसे लेकर न केवल स्थानीय श्रद्धालु बल्कि दूर-दराज से आने वाले भक्तों में भी जबरदस्त उत्साह है। महायज्ञ की शुरुआत 18 अप्रैल की सुबह भव्य कलश यात्रा के साथ हुई।

501 कलश के साथ निकली भव्य यात्रा : श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अनुसार, इस कलश यात्रा में करीब 501 कलश शामिल हुए। यात्रा में महिलाएं और युवतियां माथे पर कलश धारण कर नगर भ्रमण करती नजर आईं। गाजे-बाजे के साथ निकली इस शोभायात्रा में ऊंट और घोड़े भी आकर्षण का केंद्र रहे।

नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी यात्रा : यह कलश यात्रा विष्णुपद मंदिर से निकलकर चांद चौरा, नवागढ़ी, बहुआर चौरा, नादरागंज, कोईरीबारी, जीबी रोड, कोतवाली, रमना रोड और पंचमहला होते हुए सूर्यकुंड सरोवर पहुंची। वहां यज्ञाचार्य के नेतृत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जलभरी की रस्म पूरी की गई। इसके बाद कलश यात्रा पुनः मंदिर लौटी, जहां यज्ञ मंडप में कलशों की स्थापना की गई।

19 से 26 अप्रैल तक चलेगा महायज्ञ : महायज्ञ के दूसरे दिन यानी 19 अप्रैल को अग्निस्थापना, वेदी पूजन और मंडप पूजन की विधि संपन्न होगी। 20 अप्रैल से विधिवत महायज्ञ आरंभ होगा, जो 26 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान पांच यजमान पूरे अनुष्ठान में शामिल रहेंगे। इसके अलावा आम श्रद्धालु भी कूपन लेकर हवन और पूजा में भागीदारी कर सकेंगे।

यज्ञ मंडप और श्रीराम कथा का आयोजन : महायज्ञ के आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में धूप घड़ी के समीप भव्य यज्ञ मंडप का निर्माण किया गया है। वहीं श्रीराम कथा के लिए अलग से विशाल पंडाल तैयार किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो। 18 अप्रैल से ही श्रीराम कथा का शुभारंभ हो गया है, जिसका वाचन सुप्रसिद्ध कथावाचिका डॉ. सरोज मृणाल ब्रजवासी करेंगी। कथा का आयोजन प्रतिदिन संध्या 7 बजे से 10 बजे तक होगा।
 
सुरक्षा के व्यापक इंतजाम : महायज्ञ को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 30 अस्थायी सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जबकि पहले से 25 स्थायी कैमरे मौजूद हैं। इस तरह कुल 55 कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। साथ ही एक अत्याधुनिक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जहां से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस जवानों की तैनाती की गई है और वरीय पुलिस अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी कर रहे हैं।

प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें और आयोजन निर्विघ्न रूप से संपन्न हो। श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ की कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां शामिल हुईं, जो माथे पर कलश लेकर पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ नगर भ्रमण करती नजर आईं।