बेंगलुरु : कर्नाटक में एक तरफ जहां डीके शिवकुमार की अगुवाई में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है तो वहीं दूसरी कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के हिजाब बैन हटाने के खिलाफ ‘भगवा शॉल’ कैंपेन शुरू हुई है। यह कैंपेन हिंदू संगठनों से शुरू की है। पिछले महीने मई में सिद्धारमैया सरकार ने पहले बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा लगाए हिजाब बैन को हटा दिया था। सरकार ने एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में स्टूडेंट्स को हिजाब समेत धार्मिक निशान पहनने की इजाजत देने का फैसला किया था।
पूरे कर्नाटक में शुरु किया विरोध : कर्नाटक के नए सीएम डीके शिवकुमार 4 जून को शपथ ग्रहण करेंगे। इससे पहले हिंदू संगठनों ने पूरे राज्य में विरोध शुरू किया है। हिजाब समेत धार्मिक निशान पहनने की अनुमति देने के राज्य सरकार के फैसले के बाद कई हिंदू संगठनों ने पूरे कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। श्री राम सेना और दूसरे हिंदू ग्रुप्स के सदस्यों ने सरकार के इस कदम का विरोध करने के मकसद से राज्य भर में चलाए जा रहे कैंपेन के तहत छात्रों को भगवा शॉल बांटना शुरू कर दिया है।
हुबली से रविवार को शुरू हुई ड्राइव : यह ड्राइव रविवार को शुरू की गई, जिसमें एक्टिविस्ट्स ने हुबली और कर्नाटक के दूसरे हिस्सों में एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में भगवा शॉल बांटे। संगठनों के नेताओं ने कहा कि इस कैंपेन का मकसद एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में हिजाब की इजाजत देने के सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम तुष्टिकरण की राजनीति है और तर्क दिया कि इस पॉलिसी से कैंपस में धार्मिक मतभेद फिर से भड़क सकते हैं। राज्य सरकार ने जिसमें स्टूडेंट्स को स्कूल और कॉलेज में हिजाब, पवित्र धागा (जनेऊ), शिवधारा और रुद्राक्ष जैसे धार्मिक निशान पहनने की इजाजत दी है।
भगवा शॉल क्यों बांट रहे? : इस मुद्दे पर एक नया राजनीतिक विवाद तब शुरू हुआ जब पिछले हफ्ते कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ किया कि नई पॉलिसी के तहत एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में भगवा शॉल की इजाजत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि हिजाब, पगड़ी, रुद्राक्ष की माला और पवित्र धागे पहनने जैसी पहले से मौजूद प्रथाओं की इजाजत बनी रहेगी। बीजेपी ने इस सफाई की आलोचना की है। उसने कांग्रेस की सरकार पर तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया लगाया है।
