बंगाल : बकरीद पर गायों की हो कुर्बानी… TMC नेत्री महुआ मोइत्रा की याचिका, कलकत्ता हाई कोर्ट ने किया रद्द

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कोलकाता : पश्चिमी बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का राज खत्म हो चुका है लेकिन मुस्लिम तुष्टिकरण का मोह उससे अब भी नहीं छूट रहा है. पार्टी की सांसद महुआ मोइत्रा और पार्टी विधायक अखरुज्जमान ने अगले हफ्ते आने वाली बकरीद पर गायों की कुर्बानी की मांग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. जिसे अदालत ने सुनवाई के बाद रद्द कर दिया है.

इस्लाम में गाय कुर्बानी का हिस्सा नहीं- हाई कोर्ट : चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी की खंडपीठ ने कहा कि इस्लाम में गाय कुर्बानी का हिस्सा नहीं है और न ही वह किसी भी मजहबी परंपरा का अंग है. इसलिए याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 76 साल पहले इस संबंध में कानून बना चुकी है और अब तक वह अमल में है. इसलिए सरकार के फैसले में दखल देने का कोई औचित्य नहीं बनता है.

पशु वध को सीमित कर सकती है सरकार- अदालत : अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकार जनहित में पशु वध को सीमित कर सकती है. उसे ऐसा करने से रोका नहीं जा सकता. कोर्ट ने खुले में या सार्वजनिक जगहों पर पशुओं की कुर्बानी और वध पर सख्ती से रोक लगाने का निर्देश दिया. कहा कि यह केवल नामित और सुरक्षित स्थानों पर ही होना चाहिए. अगर कोई नियमों का उल्लंघन करे तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए.

‘देशव्यापी शाकाहारी बनाने के नजरिए से नहीं देखा जाए’ : अदालत ने काली पूजा जैसे पर्वों के दौरान मंदिरों में होने वाली सामूहिक पशु बलि पर पूर्ण बैन लगाने वाली याचिकाओं को भी खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं पर पूरी तरह से बैन नहीं किया जा सकता है. इसे देशव्यापी शाकाहारी बनाने के नजरिए से नहीं देखा जा सकता है. हालांकि याचिकाकर्ता के जोर देने पर अदालत ने गायों को छोड़कर अन्य पशुओं की कुर्बानी के लिए छूट पर विचार करने का निर्देश दिया.

फेल हुआ महुआ मोइत्रा का दांव : बताते चलें कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार बनने के बाद सीएम सुवेंदु अधिकारी फुल फॉर्म में काम कर रहे हैं. उन्होंने प्रदेश की बिगड़ी कानून-व्यवस्था को काबू पाने के लिए कई आदेश जारी किए हैं. इसमें ईद से जुड़े आदेश भी शामिल हैं. सरकार ने कहा है कि कुर्बान किए जाने वाले पशु की उम्र 14 साल से कम न हो. वह दुधारू और बीमार न हो. इस बात की सख्ती से मेडिकल जांच हो और अधिकारियों से सर्टिफिकेट प्राप्त करके कुर्बानी दी जाए. सुवेंदु सरकार ने गोवंश की कुर्बानी दिए जाने पर रोक लगा दी थी. जिसके विरोध महुआ मोइत्रा हाई कोर्ट पहुंची थीं.