पद्म-पुरस्कार@2026 : सिलंबम के ‘नायक’ पजनीवेल सम्मान लेने से पहले पीएम मोदी के आगे हुए दंडवत

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नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया. राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में उस वक्त एक अनोखा नजारा देखने को मिला जब नाम पुकारे जाने पर पारंपरिक मार्शल आर्ट विशेषज्ञ पद्म श्री पुरस्कार ग्रहण करने से पहले के पजनीवेल ने प्रधानमंत्री मोदी को साष्टांग दंडवत प्रणाम किया. हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अच्छे संस्कारों का जवाब उसी स्नेहपूर्ण और संस्कारी तरीके से दिया. पजनीवेल को झुका देखते हुए पीएम मोदी बड़ी फुर्ती के साथ अपनी कुर्सी से उठे और सिलंबम विशेषज्ञ के. पजनीवेल को उठाया.

कौन हैं पजनीवेल? : के पजनीवेल पुडुचेरी के रहने वाले हैं और उन्हें पारंपरिक मार्शल आर्ट के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया. पजनीवेल का जन्म पुडुचेरी के पूरनंकुप्पम गांव के एक सामान्य परिवार में हुआ. पजनीवेल ने बेहद साधारण परिस्थितियों से उठकर तमिलनाडु की करीब 5,000 साल पुरानी शारीरिक दक्षता की प्रतीक सिलंबम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है.

संस्कार, सेवा और समर्पण की साक्षात प्रतिमूर्ति पजनीवेल इसके बाद निर्धारित जगह पर गए और अपना पुरस्कार लेने के लिए महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्रौपदी मुर्मू की ओर बड़े अनुशासन और दक्षता के साथ बढ़े. उन्होंने पद्म पुरस्कार लेने से पहले राष्ट्रपति मुर्मू को भी आदर के साथ दंडवत प्रणाम किया. उनके शिष्यों में विदेशी छात्र भी हैं, जो इसे सीखने के लिए उनके पास आए थे. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या (25 जनवरी, 2026) को घोषित पुरस्कारों की खेल श्रेणी में जब पजनीवेल का नाम पद्म श्री के लिए चुने जाने की जानकारी आई, तब उनकी आंखों में खुशी के आसूं आ गए. उन्होंने कहा कि ये उनके लिए अप्रत्याशित रहा.

क्या है सिलंबम? : सिलंबम भारत के तमिलनाडु (प्राचीन तमिलकम) क्षेत्र में इजाद हुई प्राचीन और एतिहासिक रक्षात्मक प्रणाली है. हथियार-आधारित इस मार्शल आर्ट की धरोहर को पजनीवेल ने कई सालों से सहेज कर रखा है. केंद्र की मोदी सरकार ने उनकी असाधारण प्रतिभा और उपलब्धियों का सम्मान करते हुए उनका नाम 2026 के पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल कराया था. सिलंबम दुनिया की सबसे पुरानी मार्शल आर्ट्स में से एक मानी जाती है.

जिस तरह चीन और जापान की मार्शल आर्ट की दुनिया दीवानी है, उसी तरह भारत की सिलंबम मार्शल आर्ट भी दुनिया में मशहूर है. सिलंबम को सीखने की चाहत लेकर दूर-दूर से लोग पजनीवेल के पास आते हैं. सिलंबम का शाब्दिक अर्थ देखें तो ‘सिलम’ का अर्थ ‘पहाड़’ तथा ‘बम’ का अर्थ ‘बांस’ है. बांस का टुकड़ा इस कौशल में प्रमुख हथियार होता है. इस विद्या की एक कला में न्यूनतम शारीरिक बल का इस्तेमाल करके प्रतिद्वंद्वी को चारो खाने चित कर दिया जाता है.