कोलकाता : पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के आरोपों में TMC नेताओं की गिरफ़्तारियों की बढ़ती संख्या से पार्टी नेताओं में घबराहट फैली हुई है. अरेस्टिंग से बचने के लिए पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं ने अब विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से कथित तौर पर ‘कट मनी’ के रूप में इकट्ठा किया गया पैसा वापस करना शुरू कर दिया है.
TMC ने लोगों को लौटाए कट मनी के पैसे : दक्षिण 24 परगना के नामखाना इलाके में भी ऐसा ही नजारा सामने आया, जहां TMC का एक स्थानीय नेता लोगों से माफी मांगता नजर आया. उसने प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान दिलाने के नाम पर 45 लोगों से 5-5 हजार रुपये वसूले थे. टीएमसी नेताओं की पकड़ा-धकड़ी से डर कर उसने स्थानीय लोगों को नकद पैसे वापस कर दिए.
नामखाना ब्लॉक के कई गांवों में इस घटना ने टीएमसी के राज में हुए घोटालों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. प्रभावित लाभार्थी बताते हैं कि नेता ने उन्हें पात्र आवेदकों की सूची में शामिल करने का आश्वासन देकर पैसे लिए थे. इसके बावजूद उन्हें आवास नहीं मिला. जब भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में गिरफ्तारियां शुरू हुईं तो नेता ने डरकर रातों रात पैसे लौटाने का फैसला किया.
ममता राज में देना पड़ता था कमीशन! : स्थानीय लोगों का कहना है कि सभी पात्र लोगों को पैसे नहीं लौटाए गए हैं. काफी लोग अभी भी अपनी राशि मिलने का इंतजार कर रहे हैं. केवल प्रधानमंत्री आवास योजना ही नहीं, बंगाल में मनरेगा, किसान सम्मान निधि और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में भी कट मनी की शिकायतें लंबे समय से चली आ रही थीं. स्थानीय TMC कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि वे योजनाओं के लाभार्थियों की सूची तैयार करने और काम स्वीकृत कराने के नाम पर व्यवस्थित तरीके से पैसा वसूलते रहे हैं.
लोगों का आरोप है कि नामखाना समेत बंगाल की कई पंचायतों में यह प्रथा इतनी आम हो गई थी कि गरीब परिवारों को सरकारी मदद पाने के लिए अनिवार्य रूप से कट मनी देनी पड़ती थी. लोगों ने इसके खिलाफ ममता सरकार में शिकायतें भी की, लेकिन चूंकि टीएमसी से जुड़े लोग ही इस तरह की हरकतों में शामिल थे. इसलिए आरोपियों के खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई.
TMC में लगातार बढ़ रहा आंतरिक असंतोष : अब नामखाना की घटना के बाद TMC में भी आंतरिक असंतोष बढ़ गया है. जहां कई कार्यकर्ता ऐसी घटनाओं से पार्टी की छवि खराब होने से चिंतित हैं. वहीं विपक्षी पार्टियां इसे TMC की व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की मिसाल बता रही हैं. उनका दावा कर रही हैं कि नामखाना तो एक उदाहरण मात्र है, जब कटमनी के मामलों की बड़े पैमाने पर जांच होगी तो कई सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं.
