रांची : झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का नामांकन वैध पाया गया है। रिटर्निंग ऑफिसर ने परिमल नाथवानी के वकील का पक्ष सुनने के बाद पर्चा को वैध पाया। इससे पहले रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से भारत निर्वाचन आयोग से भी मार्गदर्शन लिया गया।
कांग्रेस की ओर से जताई गई आपत्ति : कांग्रेस का आरोप है कि कुछ दस्तावेजों में नाम ‘परिमल नाथवानी’ जबकि अन्य में ‘नाथवानी परिमल’ दर्ज है। इसके अलावा नामांकन पत्र के कुछ कॉलम रिक्त छोड़ने और आवश्यक जानकारियां उपलब्ध नहीं कराने को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार प्रणव झा के प्रस्तावक और कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने इस संबंध में लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
इसके बाद मंगलवार को नामांकन की जांच प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी और मामले की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई थी। परिमल नाथवानी की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने आपत्तियों का जवाब प्रस्तुत किया।
सलमान खुर्शीद बहस में नहीं हो सके शामिल : इस बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद बुधवार को विशेष विमान से रांची पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा दोपहर 1 बजे तक बहस के लिए समय निर्धारित किए जाने के बावजूद समय से पहले ही कक्ष का दरवाजा बंद कर दिया गया, जिसके कारण वे अपनी बात नहीं रख सके।
झारखंड विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि उन्हें इस बात का खेद है कि वे बहस में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि निर्वाचन पदाधिकारी की ओर से 1 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था। वे लगभग 12:30 बजे विधानसभा पहुंच गए, लेकिन उससे पहले ही दरवाजा बंद कर दिया गया था। इसलिए उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल सका।
इस मामले की कानूनी बारीकियों पर उनके सहयोगी अधिवक्ता सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए कुल तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। गठबंधन के दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को स्वीकार कर लिया गया, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र में कई त्रुटियां और विसंगतियां थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि नाथवानी की ओर से दाखिल शपथ पत्र (एफिडेविट) में सभी आवश्यक और सही जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गई थीं, जिसके कारण प्रारंभिक स्तर पर उनके नामांकन पर सवाल उठे थे।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से नामांकन में पाई गई कमियों और तथ्यों को निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष रखा गया था। इसके बावजूद बाद में परिमल नाथवानी के नामांकन को स्वीकार कर लिया गया, जो निर्वाचन प्रक्रिया और स्थापित नियमों की भावना के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि नामांकन से संबंधित कई गंभीर बिंदुओं पर पार्टी की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई है और पूरे मामले की कानूनी समीक्षा की जा रही है।
कांग्रेस के मंत्रियों ने किया हंगामा : इससे पहले निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को लेकर उठे विवाद के बीच बुधवार को विधानसभा परिसर में कांग्रेस कोटे से सरकार में मंत्री राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडेय सिंह और इरफान अंसारी समेत अन्य नेताओं ने जमकर हंगामा किया। कांग्रेस की ओर से अपना पक्ष रखने के लिए दिल्ली से पहुंचे वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को रिटर्निंग ऑफिसर की सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं मिलने के बाद विवाद और बढ़ गया।
कांग्रेस मंत्रियों का फूटा गुस्सा : सलमान खुर्शीद को अनुमति नहीं मिलने के बाद विधानसभा परिसर में कांग्रेस नेताओं का गुस्सा खुलकर सामने आया। झारखंड सरकार में शामिल कांग्रेस कोटे के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ,शिल्पी नेहा तिर्की, दीपिका पांडेय सिंह, इरफान अंसारी समेत अन्य नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय के बाहर विरोध जताया और जमकर हंगामा किया। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि मामले में नया शपथ पत्र स्वीकार किया गया, लेकिन उनकी ओर से आए वरिष्ठ अधिवक्ता को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण बताया।
