बिहार : भागलपुर में देर रात विक्रमशिला सेतु टूटा, मरम्मत से पहले ही गंगा नदी में गिरा पिलर का स्लैब

Bhagalpur-Ganga-Bridge-Hadsa

भागलपुर : बिहार में कोसी-सीमांचल समेत पूर्वोत्तर राज्यों को भागलपुर से जोड़ने वाले विक्रमशिला पुल के 133 नंबर पाये का स्लैब रविवार देर रात टूटकर गंगा नदी में गिर गया, जिससे इस मार्ग से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। पुल के मरम्मत की तैयारी चल ही रही थी लेकिन इसी बीच बड़ा हादसा हो गया।

बिहार के भागलपुर में 3-4 मई 2026 की देर रात विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा (पिलर नंबर 133 के पास) टूटकर गंगा नदी में गिर गया। यह 4.7 किलोमीटर लंबा पुल भागलपुर को उत्तर बिहार से जोड़ने वाली प्रमुख लाइफलाइन है। सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने यातायात पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे भागलपुर का नवगछिया और पूर्णिया से संपर्क टूट गया है।

मुख्य विवरण :

  • घटना : पिलर 133 का स्लैब धंसने से लगभग 33 मीटर का हिस्सा गंगा में गिरा।
  • समय : देर रात लगभग 12:50 बजे (3-4 अप्रैल 2026) यह हादसा हुआ।
  • क्षति : पुल के बीच का हिस्सा ढह गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।
  • बचाव : समय रहते ट्रैफिक रोके जाने के कारण कोई जनहानि नहीं हुई।
  • कारण : लंबे समय से मरम्मत न होना और पाया (pillar) नंबर 133 का पहले से कमजोर होना बताया जा रहा है।

विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट पिछले छह महीने से फाइलों में दौड़ रही थी। यह महत्वपूर्ण पुल कोसी-सीमांचल और झारखंड को जोड़ता था। स्थानीय प्रशासन स्थिति का आकलन कर रहा है और पुल के मरम्मत की रणनीति बना रहा है।

मरम्मत की तैयारी के बीच हुआ हादसा : 4.7 किलोमीटर लंबे इस पुल के मेंटेनेंस को लेकर विभागीय स्तर पर मंथन चल रहा था। अधिकारियों और अभियंताओं की टीम मरम्मत पर आने वाले खर्च का आकलन कर रही थी। भागलपुर से करीब 12 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार कर मुख्यालय भेजा गया था। पथ निर्माण विभाग के वरीय अधिकारियों ने इस पर वित्त विभाग से मंतव्य और स्वीकृति मांगी थी, ताकि समय रहते मरम्मत का कार्य शुरू कराया जा सके।

मानसून से पहले काम कराने की थी योजना : विभाग की योजना थी कि मानसून से पहले ही पुल की मरम्मत पूरी कर ली जाए, ताकि बरसात के दौरान किसी तरह की बड़ी समस्या न हो। हाल ही में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने मुख्यालय की टीम के साथ पुल का निरीक्षण भी किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मेंटेनेंस कार्य को अत्यंत आवश्यक बताते हुए जल्द प्राक्कलन भेजने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा पीरपैंती दौरे के दौरान भी उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से पुल की स्थिति पर चर्चा की थी।

2016 के बाद नहीं हुआ ठोस मेंटेनेंस : विभाग को भेजे गए प्राक्कलन के अनुसार, पिछली बार वर्ष 2016 में बड़े स्तर पर मरम्मत कार्य कराया गया था। उस दौरान पिलरों की बियरिंग बदली गई थी और कुछ हिस्सों में कार्बन प्लेट लगाकर दरारों को ठीक किया गया था। मुंबई की एक एजेंसी को चार साल के लिए मेंटेनेंस का जिम्मा भी दिया गया था, लेकिन वर्ष 2020-21 के बाद एजेंसी ने काम बंद कर दिया। इसके बाद नियमित और समुचित रखरखाव नहीं हो सका।

सतही काम तक सीमित रहा रखरखाव : पिछले चार वर्षों में मेंटेनेंस के नाम पर केवल सड़क की सफाई, बालू-गिट्टी हटाने और बिजली के बल्ब बदलने जैसे सतही कार्य ही किए गए। पुल के महत्वपूर्ण हिस्सों जैसे बियरिंग, एक्सपेंशन ज्वाइंट, कार्बन प्लेट और संरचनात्मक मजबूती से जुड़े कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती गई।

अब फिर बनेगा नया प्राक्कलन : कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार के अनुसार, मरम्मत के लिए भेजे गए प्राक्कलन पर मुख्यालय स्तर से निर्णय लिया जाना था और जल्द काम शुरू करने की योजना थी। हालांकि अब 133 नंबर पाये का स्लैब ध्वस्त हो जाने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। ऐसे में संभावना है कि पुल की मरम्मत के लिए नए सिरे से विस्तृत प्राक्कलन तैयार किया जाएगा, ताकि आगे इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।