कोलकाता : बंगाल राजभवन (लोकभवन) ने राज्य सरकार से मुर्शिदाबाद में हिंसा को रोकने और हालात को बिगड़ने से पहले काबू में करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाने का आग्रह किया है। यह अपील पश्चिम बंगाल के बाहर प्रवासी मजदूर की मौत को लेकर मुर्शिदाबाद जिले में भड़के विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर की गई।
लोकभवन ने कहा कि हाल की घटनाओं से यह स्पष्ट हुआ है कि बांटने वाली ताकतें कुछ ही घंटों में बड़ी संख्या में उग्र प्रदर्शनकारियों को जुटाने में सक्षम हैं। ऐसे में लोगों की जान की सुरक्षा, सार्वजनिक और निजी संपत्ति की रक्षा तथा आम नागरिकों के सामान्य जीवन को बाधित होने से बचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
क्या हुआ पूरा मामला? : गौरतलब है कि 16 जनवरी को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की मौत के विरोध में हिंसा भड़क उठी थी। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि बंगाली भाषा में बात करने के कारण असामाजिक तत्वों ने उसकी हत्या कर दी। विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने सड़कों और रेल पटरियों को जाम किया, कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई और एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल के रिपोर्टर के साथ मारपीट की गई। इसके अगले दिन भी हालात तनावपूर्ण बने रहे। बिहार में जिले के एक अन्य प्रवासी मजदूर पर कथित हमले के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने फिर से सड़क और रेल यातायात बाधित किया, वाहनों पर पथराव किया और एक अन्य टीवी चैनल के पत्रकार पर हमला किया गया।
लोकभवन की ओर से क्या कहा गया? : लोकभवन ने खुफिया तंत्र को मजबूत करने पर जोर देते दिया और कहा कि केंद्र, राज्य और स्थानीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है। इसके साथ ही संवेदनशील और छिद्रपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर मुखबिरों के नेटवर्क को भी प्रभावी बनाने की जरूरत है। बयान में कहा गया कि प्रशासन को तनाव वाले इलाकों पर वास्तविक समय (रियल टाइम) में नजर रखनी चाहिए, जनता मं अशांति को भड़काने वाले मुद्दों का गहन विश्लेषण करना चाहिए और संवेदनशील जिलों में सतर्कता बढ़ानी चाहिए। स्थानीय नेताओं के साथ संवाद और भरोसा कायम करना हिंसा को बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।
लोक भवन ने कानून-व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों से भीड़ नियंत्रण में संयम बरतने, उपद्रव फैलाने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने और हालात बिगड़ने से पहले प्रभावी कदम उठाने का आह्वान किया। बयान में कहा गया है कि समय पर हस्तक्षेप, समन्वित कार्रवाई और तनाव की संभावना वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देकर ही राज्य में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सकती है।
