झारखंड : चतरा में निजी क्लिनिक ने ली गर्भवती महिला-अजन्मे बच्चे की जान, इलाज के लिए वसूले 25 हजार

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चतरा : झारखंड के चतरा में झोलाछाप कथित चिकित्सक ने एक गर्भवती महिला को मौत की आगोश में सुला दिया। जिसके बाद मृतका के परिजनों ने जमकर हंगामा हुआ। वही स्वास्थ्य व्यवस्था, निजी नर्सिंग होम की कार्यशैली और सिविल सर्जन कार्यालय के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालाँकि सरकारी महकमा घटना के बाद कार्रवाई करने में जुट गया है।

चतरा शहर के बस स्टैंड के समीप संचालित मेदांता हॉस्पिटल में इलाज के बाद लावालौंग थाना क्षेत्र के चुकु गांव निवासी लाटो गंझू की 20 वर्षीय गर्भवती पत्नी वैजयंती देवी की इलाज के दौरान मौत हो गई। वैजयंती देवी आठ माह की गर्भवती थी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है।

यह है मामला : परिजनों के अनुसार चतरा बस स्टैंड के समीप संचालित मेदांता नर्सिंग होम में तीन जून से महिला का इलाज चल रहा था। तीन दिनों में मरीज के परिजनों से इलाज के नाम पर 25 हजार रुपए ले लिए गए। छह जून को परिजनों को बताया गया कि महिला की स्थिति गंभीर है। ऑपरेशन कर बच्चा निकालना पड़ेगा। इसके लिए 40 हजार रुपए जमा करना पड़ेगा। जब परिजनों ने कहा कि उनके पास 40 हजार नहीं है तो हॉस्पिटल से महिला को वापस घर भेज दिया गया। महिला घर पहुंची और उसकी मौत हो गई।

परिजनों ने बताया कि हॉस्पिटल में ही इलाज के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो चुकी थी। इसके बाद ही महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। हॉस्पिटल ने ऑपरेशन के लिए 40 हजार नहीं देने पर इलाज नहीं किया और महिला को वापस घर भेज दिया। जिससे महिला और गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।

ब्लड चढ़ाने के बाद बिगड़ी हालत : परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में महिला को एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया। जिसके लिए उनसे 9 हजार रुपए अलग से लिए गए। आरोप यह भी है कि रक्त चढ़ाने से पहले आवश्यक प्रक्रिया और क्रॉस मैचिंग नहीं की गई। रक्त चढ़ाने के बाद ही महिला की स्थिति और गंभीर हो गई। स्वास्थ्य नियमों के अनुसार रक्तदान, रक्त की जांच और क्रॉस मैचिंग की प्रक्रिया अधिकृत ब्लड बैंक के माध्यम से ही की जानी चाहिए। ऐसे में पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दो मौतों से टूटा परिवार, परिजनों का रो रो कर बुरा हाल : वैजयंती देवी की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। जिस घर में कुछ दिनों बाद बच्चे की किलकारी गूंजने वाली थी, वहां आज मातम पसरा हुआ है। एक ही घटना में मां और अजन्मे बच्चे की मौत ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है। गांव में हर आंख नम है और लोग इस घटना को लेकर दुख और गुस्सा दोनों जाहिर कर रहे हैं।

मामले को दबाने की कोशिश जारी : घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन मामले को मैनेज करने में जुटा हुआ है। अस्पताल प्रबंधन के कुछ लोग मृतक के घर पर जमे हुए हैं। मृतक के परिजनों को कुछ ले देकर मामला को रफा दफा करने का दबाव बना रहे हैं। मामला थाना तक नहीं पहुंचे, इसके लिए मेदांता हॉस्पिटल के लोग हर संभव प्रयास में जुटे हुए हैं। परिजन और ग्रामीण दोषियों पर कड़ी कार्रवाई तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

आखिर मेदांता को कैसे मिला क्लिनिकल सर्टिफिकेट : घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था, निजी नर्सिंग होम की कार्यशैली और सिविल सर्जन कार्यालय के कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मेदांता हॉस्पिटल का संचालन झोलाछाप डॉक्टर विकास यादव द्वारा किया जा रहा है। विकास यादव इससे पहले बगरा मोड़ में पारस नाम से हॉस्पिटल चलाता था। उस वक़्त जिले के तत्कालीन उपायुक्त रमेश घोलप ने फर्जी और झोलाछाप डाक्टरों के विरुद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई की थी। उस दौरान अवैध रूप से संचालित पारस हाॅस्पिटल को बंद करा दिया गया था।

जांच किए हैं, इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया है- प्रभारी सिविल सर्जन : इस मामले में प्रभारी सिविल सर्जन सह सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पंकज कुमार ने कहा कि उन्होंने मेदांता हॉस्पिटल जाकर मामले की जांच किया। इलाज में लापरवाही का मामला सामने आया है। मरीज को जो रक्त चढ़ाया गया है, वह पता नहीं कहां से लाकर चढ़ाया गया है। चतरा में रक्त के लिए रेड क्रॉस का ब्लड बैंक है, परन्तु वहां से रक्त नहीं लिया गया है। अब तक मृतक के परिजनों के द्वारा आवेदन भी नहीं मिला है। यदि परिजन इस मामले की लिखित शिकायत करते हैं तो आरोपी अस्पताल व उसके संचालकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराया जाएगा।

मौत के बाद प्रशासन हुआ सक्रिय-हॉस्पिटल को किया सील : चुकु गांव निवासी लाटो गंझू की 20 वर्षीय गर्भवती पत्नी बैजंती देवी व उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के मामले में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई किया है। मामला संज्ञान में आने के बाद उपायुक्त रवि आनंद के निर्देश पर गठित टीम ने आरोपी मेदांता हॉस्पिटल को सील कर दिया है। 

टीम में प्रभारी सिविल सर्जन सह सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ पंकज कुमार, अंचलाधिकारी अनिल कुमार व सदर थाना प्रभारी अवधेश सिंह शामिल थे। टीम में शामिल अधिकारियों ने देर शाम बस स्टैंड पहुंचकर पहले मेदांता हॉस्पिटल की जांच किया। इस दौरान अस्पताल के चिकित्सक और कर्मी फरार पाए गए। मौके पर सिर्फ मकान मालिक मिले। जिन्होंने बताया कि किराए पर विकास यादव आदि को हॉस्पिटल चलाने के नाम पर घर दिया था।

इस दौरान हॉस्पिटल में सिमरिया कसारी का रहने वाला एक मरीज राहुल भुइंया भर्ती मिला। जिसे प्रशासन की टीम ने एंबुलेंस बुलाकर सदर अस्पताल में भेजकर भर्ती कराया। इसके बाद टीम ने हॉस्पिटल के वार्ड, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर व मुख्य गेट पर ताला लगाकर उसे सील कर दिया।