जंग के माहौल से दूर भारत ने तिरंगा फहराने का बनाया रोडमैप! चंद्रमा से शुक्र मिशन तक का शेड्यूल फाइनल

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नई दिल्ली : जंग में उलझी दुनिया से अलग भारत खामोशी के साथ अपनी तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है. भारत ने चंद्रमा से लेकर शुक्र मिशन तक का शेड्यूल फाइनल कर लॉन्च कर दिया है. भारत का लक्ष्य है कि वर्ष 2040 तक देश का एक अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरे. इसे हासिल करने के लिए अब से 2040 तक हर चीज ठीक तरह से अंजाम देनी होंगी.

कब-कब लॉन्च होंगे भारत के अंतरिक्ष मिशन? : इंटरनेशनल स्पेस कांग्रेस, ग्लोबल स्पेस एक्सप्लोरेशन कॉन्फ्रेंस और मार्च 2026 में राज्यसभा में पेश हुई कई विभागीय रिपोर्ट में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के बड़े मिशनों के लॉन्चिंग ईयर शामिल आए हैं. इनमें से कुछ मिशनों की समयसीमा बढ़ गई है, तो कुछ को आगे खींच लिया गया है. इनके साथ मिलकर भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का 2047 तक का सबसे विस्तृत खाका सामने आया है.

शेड्यूल से आगे रियूजेबल रॉकेट प्रोजेक्ट? : समयरेखा में सबसे बड़ा बदलाव नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल यानी NGLV से जुड़ा है. यह तीन चरण वाला आंशिक रूप से रियूजेबल रॉकेट होगा, जो पृथ्वी की निचली कक्षा में 30 टन तक पेलोड ले जा सकेगा. यह भारत के मौजूदा सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 की क्षमता से लगभग तीन गुना होगा.

रीयूजेबिलिटी का मतलब ये होता है कि पहला चरण पूरा होने के बाद वह अपने इंजन को जलाकर खुद को धीमा करेगा और इसके बाद लंबवत सीध में उतर जाएगा. ठीक वैसे ही जैसे स्पेसएक्स के फाल्कन-9 बूस्टर करते हैं. इससे हर लॉन्च की लागत बहुत कम हो जाएगी.

सरकार दे चुकी है 8240 करोड़ रुपये की मंजूरी : NGLV प्रोजेक्ट के लिए कैबिनेट ने सितंबर 2024 में 8,240 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी. उसे डेवलप करने के लिए 96 महीने का समय तय किया गया है. इसका पहला विकासात्मक उड़ान परीक्षण सितंबर 2031 में प्रस्तावित है, जो पहले बताए गए दिसंबर 2032 से एक साल पहले है.

NGLV में पहले और दूसरे चरण में LOX-मीथेन प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल होगा, जबकि तीसरे चरण में LVM3 वाले क्रायोजेनिक इंजन का उन्नत संस्करण लगाया जाएगा.

चंद्रमा के नमूने लाएगा चंद्रयान-4 मिशन : इसरो का चंद्रयान-4 मिशन का लक्ष्य अक्टूबर 2027 ही रहेगा. यह इसरो का अब तक का सबसे जटिल मिशन होगा. इसमें दो LVM3 रॉकेट 5 अलग-अलग स्पेसक्राफ्ट मॉड्यूल ले जाएंगे. ये पृथ्वी की कक्षा में डॉक होंगे और फिर साथ में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेंगे. वहां से 3 किलो तक चंद्रमा की मिट्टी (रिगोलिथ) इकट्ठा कर वैक्यूम कंटेनर में सील करेंगे और पृथ्वी पर लाएंगे.

अभी तक किसी देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से नमूने नहीं लाए हैं. सफल होने पर भारत, अमेरिका, सोवियत संघ और चीन के बाद चंद्रमा की मिट्टी लाने वाला चौथा देश बन जाएगा.

शुक्र ग्रह के लिए क्या है भारत की योजना? : शुक्र ग्रह के लिए भारत का मिशन 2028 में प्रस्तावित है. यह यान शुक्र की परिक्रमा करेगा और वहां के वायुमंडल की संरचना, बादलों की रसायन शास्त्र, सुपर-रोटेशन के कारण और सौर वायु के प्रभाव का अध्ययन करेगा. साथ ही शुक्र की सतह का उच्च रिजोल्यूशन मानचित्र भी तैयार करेगा और संभावित ज्वालामुखी गर्म स्थानों का पता लगाएगा.

भारत और जापान का चंद्रमा पर साझा अभियान : चंद्रयान-5 (LUPEX) इसरो और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का संयुक्त मिशन है. इसरो लैंडर देगा, जबकि जापान रोवर और H3 रॉकेट उपलब्ध कराएगा. इसका लक्ष्य सितंबर 2028 में लॉन्चिंग का रखा गया है.

इस मिशन में रोवर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर खुदाई करके पानी की बर्फ की मात्रा, गहराई और रूप का पता लगाएगा. यह भविष्य के मानव मिशनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा.

स्पेस में बनेगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन : इसके साथ ही इसरो, स्पेस में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS) बनाने का भी प्लान कर रहा है. यह स्टेशन पृथ्वी से करीब 400 किमी ऊपर कम पृथ्वी कक्षा में बनेगा. इसमें पांच मॉड्यूल होंगे. इसका पहला मॉड्यूल (BAS-01) 2028 में लॉन्च होगा. जबकि,पूरा स्टेशन 2035 तक तैयार होने की उम्मीद है.

चंद्रमा पर उतरेगा पहला भारतीय : वर्ष 2036-37 में इसरो की योजना बिना मानव के चंद्रमा पर लैंडिंग, 2038-39 में मानवयुक्त चंद्र परिक्रमा, 2040 में चंद्रमा पर मानव लैंडिंग और 2047 तक स्थायी चंद्र बेस बनाने का है. इनमें से अधिकतर मिशन के लिए सरकार बजट मंजूर कर चुकी है और अब देश को अंतरिक्ष महाशक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता.