नई दिल्ली : दिल्ली का शालीमार बाग यूं तो यहां की वर्तमान विधायक और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की वजह से हाल-फिलहाल सुर्खियों में रहा, लेकिन यहीं से ताल्लुक रखने वाली डॉ. पूनम गुप्ता ने इसे एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
भारत के सबसे पुराने और सबसे बड़े स्वतंत्र, गैर-लाभकारी व आर्थिक नीति अनुसंधान थिंक टैंक नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की पहली महिला महानिदेशक रहीं डॉ. पूनम गुप्ता को हाल ही में केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का डिप्टी गवर्नर (डीजी) नियुक्त किया है। केंद्रीय बैंक के 90 वर्ष के इतिहास में इस महत्वपूर्ण ओहदे पर पहुंचने वाली डॉ. पूनम गुप्ता चौथी महिला डीजी होंगी।
तीन दशक से अधिक समय से आर्थिक क्षेत्र में अध्ययन से लेकर शोध, अध्यापन और नीति निर्माण में अहम योगदान देने वाली डॉ. पूनम गुप्ता देश-दुनिया के आर्थिक मामलों की विशेषज्ञ हैं, खासकर भारत और चीन के संबंध में। उन्होंने मौद्रिक नीति और महंगाई नियंत्रण पर गहन अध्ययन किया है।
जहां डॉ. पूनम गुप्ता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से लेकर अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी में अध्ययन और अध्यापन किया है, तो आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी वैश्विक नामचीन संस्थाओं में भी काम कर चुकी हैं। वह भारत के प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी), वित्त आयोग और नीति आयोग में भी अपना योगदान दे चुकीं हैं।
डॉ. पूनम गुप्ता का जन्म 1968 में हुआ था। बचपन से ही प्रतिभावान रहीं पूनम को माध्यमिक शिक्षा के लिए भारत सरकार से स्कॉलरशिप भी मिली थी। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के हिंदू कॉलेज से 1989 में अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स की डिग्री हासिल की।
उन्हें डीयू में सर्वश्रेष्ठ महिला प्रतिनिधि का गोल्ड मेडल भी मिला। यहीं के दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स से 1991 में एमए की उपाधि हासिल करने के बाद पूनम अमेरिका चली गईं। 1995 में उन्होंने अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी से फिर से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री ली और यहीं से 1998 में अर्थशास्त्र में पीएचडी भी की। उन्होंने इंटरनेशनल इकनॉमिक्स पर पीएचडी के लिए 1998 का एक्जिम बैंक पुरस्कार भी जीता।
डॉ. पूनम गुप्ता ने 1991 से 1993 तक दिल्ली के हंसराज और हिंदू कॉलेज में बतौर सहायक प्रोफेसर कॅरिअर की शुरुआत की। वह 1994 से 1996 तक इंटर्न के रूप में विश्व बैंक से जुड़ीं। पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (आईएमएफ) में 1998 से 2006 तक काम किया। 2006 से 2008 तक दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स (डीयू) में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पढ़ाने का अनुभव भी उनके पास है।
2009 से 2011 तक डॉ. पूनम ने इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकनॉमिक रिलेशंस में मैक्रोइकनॉमिक्स की प्रोफेसर के रूप में काम किया। इसके बाद वह वर्ष 2013 में वरिष्ठ अर्थशास्त्री के तौर पर फिर से विश्व बैंक का हिस्सा बन गईं। 2017 में इसी में लीड इकनॉमिस्ट ऑफ इंडिया भी बनीं। 2021 तक करीब आठ वर्ष उन्होंने इस संस्थान में काम किया।
इस दौरान 2020 से 2021 के बीच इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (आईएफसी) के ग्लोबल मैक्रो एंड मार्केट रिसर्च में लीड इकनॉमिस्ट के रूप में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2021 में डॉ. पूनम गुप्ता नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की पहली महिला महानिदेशक बनीं और अभी तक इस पद पर सुशोभित थीं।
नई डिप्टी गवर्नर (डीजी) बनीं डॉ. पूनम गुप्ता की आरबीआई में यह दूसरी पारी होगी। इससे पहले उन्होंने 2011-2013 के दरम्यान राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआईपीएफपी) में आरबीआई की चेयर प्रोफेसर के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। करीब चौदह वर्ष बाद फिर से किसी महिला को आरबीआई के डिप्टी गवर्नर पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनसे पहले केजी उदेशी (2003-2005), श्यामला गोपीनाथ (2004-2009) और उषा थोराट (2005-2010) आरबीआई की डीजी रह चुकी हैं।
डॉ. पूनम गुप्ता ने ‘इमर्जिंग जायंट: चाइना एंड इंडिया इन द वर्ल्ड इकनॉमी’ शीर्षक से एक किताब भी लिखी है। इसके अलावा इंडिया पॉलिसी फोरम वॉल्यूम 18, 19, 20 और 21 का प्रकाशन भी किया है। अर्थव्यवस्था पर उनके विचार देश-दुनिया की प्रमुख पत्रिकाओं और समाचार पत्रों जैसे- इकनॉमिस्ट, फाइनेंशियल टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल, इकनॉमिक टाइम्स, फाइनेंशियल एक्सप्रेस आदि में लेखों के जरिये प्रकाशित हो चुके हैं।
डॉ. पूनम गुप्ता की शादी प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. सुधीर मिश्रा के साथ हुई है, जो वर्तमान में इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) में निदेशक और मुख्य कार्यकारी हैं। खास बात यह है कि दोनों ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक और स्नातकोत्तर किया है, तो अमेरिका की मैरीलैंड यूनिवर्सिटी में भी उन्होंने पढ़ाई की है।
डॉ. पूनम गुप्ता जनवरी में सेवानिवृत्त होने वाले डीजी माइकल पात्रा की जगह लेंगी। उनकी नियुक्ति तीन वर्ष के लिए की गई है। आरबीआई में चार डीजी होते हैं। डीजी के रूप में उन्हें 2.25 लाख रुपये का मासिक वेतन मिलेगा।