झारखंड : हेमंत सोरेन के 1.5 लाख के जैकेट पर बवाल! दावोस में CM का स्वैग

Cm-Hemant-Jacket

रांची : ‘सीएम भाई हेमंत सोरेन स्विटजरलैंड के दावोस में हैं। लगता है तगड़ी वाली शॉपिंग हूई है| इंटरनेट पर सर्च करने से पता चला कि जैकेट की कीमत विदेशी मुद्रा में $1626.76 डालर है। भारतीय मुद्रा के हिसाब से ₹145,990.00 रुपया मात्र। कई साल से कह रही हूं अपनी इस गरीब बहन को एयरबैग राइडिंग जैकेट दिलवा दीजिए। अगर दिला दिया होता तो @MotoGP रेसिंग ट्रैक पर मोटरसाइकल भगा रही होती। इंटरनेट पर रिसर्च नहीं।’ हेमंत सोरेन की तस्वीर और जैकेट की कीमत के साथ इस बयान को पोस्ट करने वाली माउंटेन बाइकर कंचन उगुरसेंडी ने अपनी मांग सीएम के सामने रखी है। कंचन उगुरसेंडी माउंटेन बाइक हैं। उन्होंने माउंटेन बाइकिंग में रिकॉर्ड कायम किया है। झारखंड की आदिवासी गर्ल कंचन को कौन नहीं जानता।

झारखंड के सरायकेला के बिदरी गांव की रहने वाली कंचन उगुरसेंडी का ये एक्स पर पोस्ट वायरल हो गया है। लोग तरह- तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दावोस में प्रस्तावित विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं। उसी दौरान उन्होंने भी एक तस्वीर अपने एक्स पर पोस्ट की है, जिसमें वो राजदूत के साथ दिख रहे हैं। उसी तस्वीर को कंचन उगुरसेंडी ने भी पोस्ट करके जैकेट की कीमत बताई है। कंचन ने इस पोस्ट को हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन के साथ शेयर किया है। एक्स पर ये पोस्ट वायरल हो गया है।

इंटरनेट पर यूजर्स ने इस पोस्ट पर जबरदस्त प्रतिक्रिया दी है। लोगों ने लिखा है कि हेमंत सोरेन के पास करोड़ों की चप्पल और सैंडल है। इनकी बीबी के पास महंगे सैंडल हैं। लोगों ने ये भी सुझाव दिया है कि कल्पना सोरेन से पैरवी करानी चाहिए थी। लोगों ने करदाताओं के पैसे का ख्याल करने का सवाल उठाया है। कुछ यूजर ने तंज कसते हुए लिखा है कि अब लोग चैन से जैकेट भी नहीं पहनने देंगे।

झारखंड के सरायकेला के बिदरी गांव की आदिवासी गर्ल कंचन उगुरसेंडी ने अपनी हिमालयन बाइक से दुनिया के सबसे कठिन रास्तों के जरिए पहुंचकर रिकॉर्ड कायम किए हैं। उन्होंने कुछ ऐसा किया, जिसे अनुभवी बाइकर्स भी नहीं कर पाए। कंचन ने अपनी साहसिक यात्राओं से लोगों का दिल जीत लिया। कुछ दिन पहले कंचन ने भारत- नेपाल और चीन की सीमा के पास स्थित लिपुलेख दर्रे पर बाइक से पहुंचकर एतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी। वहां पर अभी तक कोई महिला बाइकर नहीं पहुंची थी। ये सफर कंचन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।