खूंटी : झारखंड में खूंटी के पहड़ा राजा सोमा मुंडा हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी और उन्हें फांसी की सजा देने की मांग को लेकर शनिवार को विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा आहूत झारखंड बंद का व्यापक असर राजधानी रांची सहित राज्य के कई जिलों में देखने को मिला। सुबह से ही आदिवासी संगठन सड़कों पर उतर आए और दुकानों को बंद कराया। खूंटी, रांची और आसपास के इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित रहा।
सुबह से ही बंद समर्थकों ने प्रमुख चौक-चौराहों पर पहुंचकर सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग सोमा मुंडा हत्याकांड के सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय दिलाने की है। आदिवासी संगठनों का कहना है कि यह हत्या केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के सम्मान और नेतृत्व पर हमला है।
कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं : बंद के दौरान कई स्थानों पर टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। रांची-टाटा मार्ग सहित खूंटी जिले के प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बसों का परिचालन पूरी तरह ठप रहा, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं। स्कूल और कॉलेज खुले रहे, लेकिन छात्रों की उपस्थिति काफी कम दर्ज की गई। व्यावसायिक गतिविधियों पर भी बंद का स्पष्ट असर देखने को मिला।
बंद को देखते हुए खूंटी जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा। जिला प्रशासन ने 42 दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की है। जिला मुख्यालय समेत सभी प्रखंडों और संवेदनशील स्थानों पर प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। नियंत्रण कक्ष, अग्निशमन विभाग और चिकित्सा सेवाओं को भी सतर्क रखा गया है।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई का वादा : पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि मामले की जांच तेजी से की जा रही है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। खूंटी के नीचे चौक पर प्रदर्शन कर रहे आदिवासी नेताओं मार्शल बारला, प्रभात मुंडा और जग्गू मुंडा सहित अन्य नेताओं ने कहा कि झारखंड में लगातार आदिवासी नेताओं की हत्याएं हो रही हैं, लेकिन राज्य सरकार इस पर गंभीरता नहीं दिखा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। नेताओं ने चेतावनी दी कि जब तक सोमा मुंडा के हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होती और उन्हें फांसी की सजा नहीं दी जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
