रांची/पलामू : झारखंड के पलामू जिले में विकास को नई रफ्तार मिली है। वर्षों से बंद पड़ी राजहरा कोल माइंस का संचालन एक बार फिर शुरू हो गया है। सांसद बीड़ी राम के निरंतर प्रयासों के बाद इस महत्वपूर्ण परियोजना को पुनर्जीवित किया गया। शनिवार को केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने इसका विधिवत उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित किया।
केंद्रीय मंत्री के पलामू पहुंचने पर सांसद विष्णु दयाल राम, भाजपा जिलाध्यक्ष अमित तिवारी सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। उद्घाटन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, श्रमिक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। माइंस के पुनः संचालन से पूरे क्षेत्र में उत्साह और उम्मीद का माहौल देखने को मिला।
‘यह परियोजना पलामू के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी’ : इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि राजहरा कोल माइंस से निकला कोयला न केवल देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाएगा, बल्कि विदेशों में भी निर्यात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना पलामू के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी। माइंस के शुरू होने से सैकड़ों स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा, जिससे पलायन पर भी रोक लगेगी।
मंत्री ने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार झारखंड में कोयला आधारित विकास को गति देने के लिए हरसंभव सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि खनन कार्य पूरी पारदर्शिता और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया जाएगा, ताकि विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों के हित भी सुरक्षित रह सकें।
हालांकि, कोलवाड़ी क्षेत्र के कुछ ग्रामीणों ने मुआवजा नहीं मिलने को लेकर नाराजगी जताई और अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा। वहीं, अधिकांश ग्रामीणों ने माइंस के पुनः संचालन को रोजगार और विकास का नया द्वार बताते हुए खुशी जाहिर की। प्रशासन और कंपनी प्रबंधन की ओर से प्रभावितों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया गया है।
राजहरा कोल माइंस के संचालन से न केवल पलामू क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा देगी और पलामू को औद्योगिक मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाएगी।
