हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग नगर निगम चुनाव में एक बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायी परिणाम सामने आया है। पेशे से पत्रकार और वकील रहे अरविंद कुमार राणा ने धनबल और बड़े राजनीतिक चेहरों को पछाड़ते हुए मेयर पद पर कब्जा जमा लिया है। खुद को ‘फकीर’ बताने वाले राणा ने जनता से चंदा मांगकर चुनाव लड़ा और निकटतम प्रतिद्वंद्वी मो. सरफराज अहमद को 4657 मतों के अंतर से शिकस्त दी।
मेयर बने अरविंद कुमार राणा क्या काम करते? : अरविंद कुमार राणा का सफर कलम और कानून से शुरू होकर अब नगर सरकार के शीर्ष पद तक जा पहुंचा है। वे लंबे समय तक पत्रकारिता और वकालत से जुड़े रहे हैं। रोचक बात यह है कि इसी चुनाव में एक और पत्रकार अरविंद गुप्ता ने भी छतरपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है, जो रांची प्रेस क्लब के एग्जीक्यूटिव मेंबर रह चुके हैं। अरविंद कुमार राणा अब लोकतंत्र के इस नए स्तंभ के रूप में अपनी तीसरी बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। हजारीबाग नगर निगम के साथ वार्डों के भी रिजल्ट जारी हुए हैं।
जनता से सहयोग राशि लेकर अरविंद राणा ने लड़ा चुनाव : चुनाव प्रचार के दौरान अरविंद राणा की सादगी चर्चा का विषय बनी रही। वे मतदाताओं से न केवल वोट मांगते थे, बल्कि चुनाव लड़ने के लिए सहयोग राशि (भीख) की अपील भी करते थे।
अरविंद राणा ने एक इंटरव्यू में कहा था- ‘मेरे पास चुनाव लड़ने के लिए पैसे नहीं थे, लेकिन जनता के बीच किए गए सालों के सामाजिक कार्यों की पूंजी थी। मैंने अपने हलफनामे में भी साफ किया था कि मेरे पास महज 10-20 हजार रुपये हैं। चुनाव के लिए मुझे जनता ने खुद 1 लाख 35 हजार रुपये का चंदा दिया।’
अरविंद राणा ने हिंदुत्व के एजेंडे पर बीजेपी प्रत्याशी को दी मात : हजारीबाग नगर निकाय चुनाव में अरविंद राणा का अंदाज पूरी तरह पारंपरिक और आध्यात्मिक रहा। ललाट पर सिंदूर का तिलक और गले में भगवा अंगवस्त्र धारण कर उन्होंने ‘प्रखर हिंदुत्व’ को अपना मुख्य मुद्दा बनाया। उन्होंने जनता के बीच दावा किया कि वे ही असली हिंदुत्व की राह पर चलने वाले प्रत्याशी हैं। ‘घर वापसी’ जैसे मुद्दों पर उनके पुराने कार्यों ने उन्हें जमीन पर मजबूती दी, जिसके चलते वे हिंदुत्व के मोर्चे पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी को भी पछाड़ने में कामयाब रहे।
जीत के बाद भावुक हुए अरविंद राणा : ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद अरविंद राणा ने हजारीबाग की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह जीत उनकी नहीं, बल्कि एक बेहतर शहर का सपना देखने वाले हर नागरिक की है।
