कोलकाता : पश्चिम बंगाल की नई बीजेपी सरकार ने घुसपैठियों को भगाने के लिए तेजी से काम करना शुरू कर दिया है. राज्य की सुवेंदु सरकार ने ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ रणनीति के तहत काम करना शुरू कर दिया है. राज्य में अभी तक कुल 11 डिटेंशन सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिसमें 300 से अधिक लोगों को रखा गया है. इन लोगों के पास कोई वैध दस्तावेज नहीं था. इस बीच बांग्लादेश सीमा के पास स्थित हाकिमपुर चेकपोस्ट पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी.
दरअसल, दावा किया जा रहा है कि बंगाल सरकार की ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ रणनीति के बाद कुछ घुसपैठिए खुद बांग्लादेश सीमा पर स्थित हाकिमपुर चेकपोस्ट पर एकत्र हुए हैं. यहां पर इन लोगों के दस्तावेजों की जांच की रही है. इनमें से अधिकांश के पास बांग्लादेश के दस्तावेज हैं और यह अवैध तरीके से भारत में रह रहे थे. इन्हीं घुसपैठियों में से एक अब्दुल का दर्द छलका है.
बांग्लादेश के अब्दुल ने क्यों कहा पहले आराम था : समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर 24 परगना में बांग्लादेश से अवैध तरीके से आए अब्दुल ने कहा कि हमारे पास कोई दस्तावेज नहीं है. मैं खुद साल 2017 में यहां आया था. करीब 9 साल से सब कुछ ठीक चल रहा था. अब्दुल ने कहा कि सरकार का फरमान है कि जिसके पास दस्तावेज नहीं है, वह यहां नहीं रुक सकता वरना उसको जेल या जुर्माना हो सकता है. अब्दुल ने बताया पहले हम किराया नहीं दे पाते थे, लेकिन बाद में कुछ स्थानीय मुसलमानों ने हमारी मदद की. आज तक किसी ने हमसे वापस जाने को नहीं कहा था.
‘दीदी थीं तो कोई समस्या नहीं थी’ : अब्दुल ने कहा कि जब से बंगाल में बीजेपी की सरकार आई है, हमें यहां से जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है. इससे पहले, जब दीदी (पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) यहां थीं, तब कोई समस्या नहीं थी। जब दीदी थीं, तब हालात बेहतर थे। अब जब नई सरकार सत्ता में आ गई है, तो हम डर के मारे यहां से जा रहे हैं. अब्दुल ने बताया कि उसके पास केवल बांग्लादेश के दस्तावेज हैं और वह बंगाल में रहकर रिक्शा चलाता था.
सीएम सुवेंदु ने खुद दी है चेतावनी : गौरतलब है कि बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी ने खुद एक बैठक के दौरान घुसपैठियों को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा कि या तो खुद भाग जाओ, वरना सरकार को जो करना है करेगी. इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जो भी घुसपैठिए हिरासत में लिए गए हैं, उन्हें तुरंत बांग्लादेश भेजा जाए.
