झारखंड : हजारीबाग के चलकुशा में सुबह टहलने निकले बुजुर्ग को हाथियों ने कुचला, मौके पर हुई मौत

Hazaribag-Elephant-Attack-Death

हजारीबाग : झारखंड के हज़ारीबाग अंतर्गत चलकुशा प्रखंड में एक बुजुर्ग की हाथियों ने जान ले ली। हाथियों ने उन्हें कुचलकर मार डाला। यह घटना चौबे ग्राम में कमला फाटक के पास रविवार को सुबह पांच बजे के आसपास हुई। इस क्षेत्र में चार साल पहले भी जंगली हाथियों ने एक बुजुर्ग दंपति की जान ले ली थी।

बताया जाता है कि 65 वर्ष के बद्री चौधरी रविवार की सुबह टहलने के लिए घर से निकले थे। कमला फाटक के पास अपने समूह से बिछड़े दो जंगली हाथी उनके सामने आ गए। इससे पहले कि बद्री प्रसाद वहां से भागते, हाथियों ने उनको कुचलकर मार डाला। इससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

जन प्रतिनिधियों ने जताया रोष : इस घटना पर गांव के लोगों में रोष फैल गया। जिला पंचायत सदस्य सविता सिंह सहित अन्य जन प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। उन्होंने वन विभाग की लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई। सविता सिंह ने कहा कि जंगली हाथियों का आक्रामक व्यवहार बढ़ता जा रहा है लेकिन वन विभाग इस पर कोई कदम नहीं उठा रहा है। उन्होंने कहा कि चलकुशा क्षेत्र में जंगली हाथी दो दिन से विचरण कर रहे हैं। वन विभाग इन हाथियों पर नजर रखता और क्षेत्र के लोगों को समय-समय पर चेताता रहता तो यह घटना नहीं होती।

बुजुर्ग के परिवार को दी मदद राशि : जब वन विभाग को इस घटना की सूचना मीली तो विभाग के हजारीबाग पश्चिमी प्रमंडल की ओर से बद्री चौधरी के परिवार को 50 हजार रुपये की मदद राशि दी। बताया गया है कि मुआवजे की बाकी राशि शव का पोस्टमार्टम होने और विभाग की रिपोर्ट आने के पश्चात दिया जाएगा।

चार साल बाद हुई वैसी ही घटना : हजारीबाग के चलकुशा क्षेत्र में पहले हाथियों के हमले की घटनाएं हुई हैं, लेकिन वन विभाग ने इन्हें रोकने के लिए कोई जरूरी प्रयास नहीं किए। इसी क्षेत्र के बेदमक्की गांव में 15 अप्रैल 2022 को अपने खेत में काम कर रहे 65 साल के वेदलाल पंडित और उनकी 60 साल की पत्नी शांति देवी को जंगली हाथी ने मार डाला था।

झुंड से बिछड़कर आक्रामक हो जाते हैं जंगली हाथी? : रविवार को हुई घटना और यह चार साल पहले हुई उक्त घटना में काफी समानता है। सन 2022 में हुई घटना में 13 जंगली हाथियों के झुंड से बिछड़े एक हाथी ने वेदलाल पंडित पर हमला किया था और उनको कुचलकर मार डाला था। जब उनको बचाने के लिए उनकी पत्नी शांति देवी जोर से चीखीं तो आक्रामक हाथी ने उन्हें सूंड में उठाकर उछाल दिया था। इससे वे गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। बाद में उनकी मौत हो गई थी। इन दोनों घटनाओं को देखते हुए संकेत मिलते हैं कि जंगली हाथी अपने समूह से बिछड़ने के बाद आक्रामक हो जाते हैं। ऐसे में उनकी मॉनिटरिंग करके उन्हें उनके झुंड में पहुंचना जरूरी है।

वन विभाग घटनाएं रोकने में नाकाम : हजारीबाग जिले में बरकट्ठा क्षेत्र के टाटीझरिया, दारू, और चलकुशा इलाकों में जंगली हाथियों के झुंड अक्सर आते हैं। वे इन इलाकों में जान माल को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। गांवों में रहने वाले लोगों को हाथी अक्सर निशाना बनाते हैं। हाथियों के समूह खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। वन विभाग इन घटनाओं को रोकने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं कर सका है।