रांची : प्रकृति पर्व सरहुल पर पूरी राजधानी प्राकृतिक रंगों और आस्था के सैलाब में डूबी नजर आई। सरहुल पर्व पर पूजा के दौरान पाहन (आदिवासी पुजारी) ने इस वर्ष बारिश को लेकर बड़ी भविष्यवाणी कर दी। राजधानी रांची में सरहुल शोभा यात्रा के उद्गम स्थल हातमा (सरना टोली) स्थित सरना स्थल पर पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ पूजा-अर्चना की गई। इस मौके पर मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने सरई (सखुआ) के पेड़ों की छांव में प्रकृति और देवी-देवताओं का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने निम्न बलि और अर्पण के माध्यम से लोक कल्याण की कामना की।
अच्छी बारिश और अन्न भंडार भरे रहने की भविष्यवाणी : मुख्य पाहन जगलाल पाहन की ओर से पूजा-अर्चना के बाद इस वर्ष झारखंड में अच्छी बारिश की भविष्यवाणी की गई। पाहन की ओर से उम्मीद जताई गई है कि इस बार अच्छी बारिश के कारण भंडार अन्न से भरे रहेंगे।
सीएम हेमंत सोरेन सरहुल पूजा महोत्सव में शामिल हुए : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर, करमटोली, रांची में आयोजित सरहुल पूजा महोत्सव-2026 में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हातमा स्थित सरना स्थल भी पहुंचे।
रांची में निकाली गई भव्य शोभायात्रा : प्रकृति पर्व सरहुल को लेकर हर साल की भांति इस वर्ष भी आदिवासी समुदाय की ओर से राजधानी रांची में भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। शोभा यात्रा से पहले रांची के सभी सरना स्थलों पर पारंपरिक विधि-विधान से पूजा की गई। इस दौरान सभी मौजा के युवाओं ने केकड़े और मछलियां पकड़ीं और जल रखाई की पूजा की।
आदिवासी समुदाय के लिए बहुत बड़ा क्षण : मुख्यमंत्री ने प्रकृति पर्व सरहुल के अवसर पर यहां आयोजित महोत्सव में सम्मिलित होकर पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की तथा समस्त झारखंड वासियों के कल्याण की प्रार्थना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि आज उत्साह और हर्षोल्लास का दिन है। आदिवासी समुदाय के लिए आज एक बहुत बड़ा क्षण है। हर वर्ष हम लोग इस प्रांगण में मिलते रहे हैं, आगे भी आते रहेंगे, आप सभी से मिलते भी रहेंगे।
प्रकृति से बड़ी पूजा और कुछ नहीं : मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार हमारे पूर्वजों ने हमें सरहुल महोत्सव जैसी समृद्ध परंपराओं के निर्वाह की जिम्मेदारी हमारे कंधों पर दिया है, हम आने वाले समय में अपनी पीढ़ी के कंधों पर इन परंपराओं के निर्वहन का जिम्मा सौंपेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति से बड़ी पूजा और कुछ नहीं है। प्रकृति में ही सभी चीजों का सृजन और विलय होता है।
प्रकृति है तो मानव मानव जीवन है : मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर प्रकृति नही होता तो मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। अगर प्रकृति ना होती तो संसार में कोई जीव-जंतु भी नहीं होती। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी प्रकृति के द्वारा रचाई और बसाई गई व्यवस्था है और इस व्यवस्था के प्रति आदिवासी समूह की अटूट आस्था है। मौके पर हेमंत सोरेन ने मांदर बजाकर आदिवासी कॉलेज छात्रावास परिसर में आयोजित सरहुल महोत्सव-2026 की खुशियों को दोगुनी कर दी।
समृद्ध परंपराओं को आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रकृति से हम सभी को जुड़ने की जरूरत है। प्रकृति जब सुरक्षित रहेगी तब हमारा अस्तित्व भी रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में आपा-धापी के बीच जीवन यापन हो रहा है। हमारे पूर्वजों ने हमें बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से दीर्घकालिक सोच के साथ कुछ ऐसी व्यवस्थाएं बनाई हैं जिसके तहत हम लोग एक साथ एक मंडप में एक छत के नीचे, एक पेड़ के नीचे एकत्रित होते हैं। इन सभी व्यवस्थाओं को हमें प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। हम सभी लोग प्रकृति की रक्षा करें और अपने जीवन को सुरक्षित करें।
प्रकृति पर्व सरहुल की शुभकामनाएं : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज के पावन अवसर पर सिर्फ मानव ही नहीं बल्कि प्रकृति भी झूम रहा है। निश्चित रूप से हमें गर्व होना चाहिए कि हम एक ऐसी व्यवस्था के उपासक हैं, जहां से जीवन शुरू होता है। आज के इस पावन अवसर पर हमारी ओर से आपको एवं आपके परिवारजनों सहित समस्त राज्यवासियों को प्रकृति पर्व सरहुल की ढेर सारी शुभकामनाएं। मौके पर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की एवं विधायक कल्पना सोरेन ने भी अपनी ओर से झारखंड वासियों को प्रकृति पर्व सरहुल महोत्सव की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
