जमशेदपुर : झारखंड के जमशेदपुर से रांची पुलिस ने एक बड़े जमीन घोटाले के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी करीब 200 करोड़ रुपये की जमीन के घोटाले के मामले में की गई है। बताया जाता है कि पुलिस ने पूर्व मंत्री के रिम्स के पूर्व सहयोगी दिनेश अग्रवाल, आयन सरकार और निलय सेनगुप्ता को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार किए गए तीनों लोग विनय चौबे से जुड़े जमीन घोटाले में शामिल बताए जा रहे हैं। इन तीनों की गुरुवार को गिरफ्तारी की गई है। गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की गई और फिर उन्हें पुलिस रांची ले गई।
पूर्व मंत्री का सहयोगी मुख्य आरोपी : यह बहुचर्चित जमीन घोटाला है। यह गिरफ्तारी रांची और जमशेदपुर पुलिस ने मिलकर की है। यह 200 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित जमीन घोटाले के साथ स्वास्थ्य विभाग में किए गए घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई है। पुलिस की टीम ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के रिम्स प्रतिनिधि रहे दिनेश अग्रवाल, उनके सहयोगी अयान सरकार और निलय सेनगुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है।
बताया जाता है कि तीनों गिरफ्तार आरोपियों से बिष्टुपुर पुलिस थाने में गहन पूछताछ की गई। इसके बाद उन तीनों को जमशेदपुर से रांची ले जाया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई रांची के सिटी एसपी पारस राणा के नेतृत्व में हुई।
पूर्व आईएएस विनय चौबे से जुड़े तार : पुलिस तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करके पहले जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाने में लाई। थाने में उनसे पूछताछ की गई। इनमें से एक आरोपी निलय सेनगुप्ता को जमशेदपुर के सिटी एसपी के आवास पर ले जाया गया। उससे पुलिस अधिकारियों ने कई घंटे तक पूछताछ की। बताया जाता है कि इस केस के तार पूर्व आईएएस विनय चौबे से भी जुड़े हुए हैं। एसीबी इसकी जांच कर रही है।
एक सप्ताह से जारी था पुलिस का अभियान : दिनेश अग्रवाल की गिरफ्तारी की जानकारी उनके बड़े भाई अशोक अग्रवाल ने दी है। उनके अनुसार, गुरुवार को दिनेश कदमा में भाटिया बस्ती के अपने आवास से निकले तो कदमा रंकिणी मंदिर के पास पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। रांची पुलिस की टीम एक सप्ताह से शहर में मौजूद थी। पुलिस दिनेश अग्रवाल और अयान सरकार को तलाश रही थी।
कोलकाता तक फैला नेटवर्क : यह झारखंड का एक चर्चित जमीन घोटाला है जिसे पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता से नजदीकी का फायदा उठाकर अंजाम दिया गया था। जमशेदपुर के कदमा के निवासी आरोपी दिनेश अग्रवाल पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के रिम्स के प्रतिनिधि थे। उनके दो साथी अयान सरकार और निलय सेनगुप्ता का नेटवर्क कोलकाता तक फैला था।
फर्जी दस्तावेज बनाता था गिरोह : बताया जाता है कि इस घोटाले को अंजाम देने वाला यह गिरोह कोलकाता और रांची के रिकॉर्ड रूम से पुराने दस्तावेजों की चोरी करने या उनमें छेड़छाड़ करके जमीनों के फर्जी मालिक बनाने में माहिर था। दिनेश अग्रवाल जमशेदपुर की अच्छी लोकेशनों पर स्थिति जमीनों के फर्जी कागजात तैयार करवाता था। वह बिचौलिए और फाइनेंसर की भूमिका निभाता था। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के नजदीकी दिनेश अग्रवाल को रांची के रिम्स में एक खास चैंबर दिया गया था। वह स्वास्थ्य विभाग के कार्यों में हस्तक्षेप करता था।
