जमशेदपुर : काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) की ओर से घोषित 12वीं (आईएससी) बोर्ड के परिणामों में जमशेदपुर की होनहार बेटी ने पूरे देश में लौहनगरी का डंका बजाया है। शहर के प्रतिष्ठित सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल की होनहार छात्रा शांभवी तिवारी ने 12वीं की बायो साइंस परीक्षा में अपना अविश्वसनीय प्रदर्शन करते हुए 100 प्रतिशत अंक प्राप्त कर नेशनल टॉपर बनने का ऐतिहासिक गौरव हासिल किया है।
शांभवी ने विज्ञान संकाय के सबसे कठिन माने जाने वाले विषयों भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और अंग्रेजी में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। उनकी इस शानदार सफलता ने पूरे शहर को गौरवान्वित किया है और यह साबित कर दिया है कि सच्ची लगन और एकाग्रता से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।
पूरे देश में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाली शांभवी तिवारी का अगला और सबसे बड़ा लक्ष्य मेडिकल के क्षेत्र में अपना शानदार करियर बनाना है। उनका सपना एक बेहतरीन डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। इसी कड़ी में आगामी 3 मई को वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीटमें शामिल होने जा रही हैं। इस परीक्षा के लिए उनका केंद्र शहर के अब्दुल बारी कॉलेज में निर्धारित किया गया है। 12वीं में नेशनल टॉपर बनने जैसी असाधारण उपलब्धि हासिल करने के बाद भी शांभवी जश्न में डूबने के बजाय नीट परीक्षा की तैयारियों में पूरे जी-जान से जुटी हुई हैं और अपनी तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए लगातार मॉक टेस्ट दे रही हैं।
शांभवी की इस राष्ट्रीय स्तर की सफलता के पीछे उनके सुशिक्षित और सकारात्मक पारिवारिक माहौल का बहुत बड़ा योगदान है। उनके पिता राकेश रमन आदित्यपुर स्थित ऑल इंडिया रेडियो में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत हैं और उनका निवास आदित्यपुर में आकाशवाणी भवन के ठीक पीछे स्थित है। वहीं, उनकी माता निभा सिन्हा सेंट मैरी इंग्लिश हाई स्कूल में पीजीटी केमिस्ट्री की शिक्षिका हैं। माता-पिता दोनों ने ही हमेशा शांभवी की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और घर में एक प्रेरणादायक माहौल बनाए रखा, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की।
बेटी की अपार कामयाबी पर खुशी जताते हुए पिता राकेश रमन ने बताया कि शांभवी का फोकस शुरुआत से ही अपनी पढ़ाई और करियर पर केंद्रित रहा है। 12वीं के साथ-साथ उनका मुख्य लक्ष्य नीट क्रैक करना था, जिससे उनके बोर्ड की तैयारी अपने आप मजबूत और गहरी होती चली गई। अपनी दिनचर्या में शांभवी रोजाना करीब 9 घंटे की कड़ी मेहनत करती हैं। स्कूल के दिनों में वह वापस आकर दो-दो घंटे के स्लॉट में देर रात तक पढ़ाई करती थीं। अब स्कूल खत्म होने के बाद वह अपनी सुबह की शुरुआत भी सेल्फ स्टडी से करती हैं। साकची स्थित आकाश कोचिंग संस्थान से भी उन्हें नीट के लिए अहम मार्गदर्शन मिला है। इस पूरी सफलता की सबसे खास बात यह रही कि शांभवी ने खुद को सोशल मीडिया और मोबाइल के अनावश्यक उपयोग से पूरी तरह दूर रखा।
राकेश रमन ने बताया कि उन्होंने कभी भी शांभवी पर पढ़ाई के लिए कोई दबाव नहीं बनाया। पढ़ना शांभवी का अपना शौक है और वह सेल्फ स्टडी पर ही सबसे अधिक भरोसा करती हैं। हालांकि, जरूरत पड़ने पर वह एक पिता के तौर पर उसे सही दिशा जरूर दिखाते हैं। अन्य छात्रों को सफलता का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि हर स्टूडेंट को अपनी अंदरूनी ताकत और क्षमता को पहचानना चाहिए। चाहे विषय आर्ट्स हो, कॉमर्स हो या साइंस, जिसमें सबसे ज्यादा दिलचस्पी हो, उसी में करियर बनाना चाहिए। छात्रों को हमेशा खुद पर विश्वास रखना चाहिए और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सोशल मीडिया जैसी भटकाने वाली चीजों से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए।
