नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल में इस बार अब तक का सबसे आक्रामक चुनाव हुआ। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी दम झोंकी। वोटिंग के बाद लोगों को यह जानने की बेताबी है कि राज्य में ममता दीदी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस चौथी बार सत्ता में वापसी करेगी या फिर भाजपा ऐतिहासिक जीत हासिल करके पहली बार राज्य सरकार बनाएगी? राज्य के 23 जिलों में 77 केंद्रों पर त्रिस्तरीय सुरक्षा के बीच 293 विधानसभा सीटों की मतगणना की जा रही है, जिसमें कुल 2,926 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना है।
शुभेंदु अधिकारी का बयान- ममता की हार राजनीति से विदाई जैसी : भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को हराना बेहद जरूरी था और यह परिणाम उनकी राजनीतिक यात्रा के अंत की तरह है। शुभेंदु ने आगे दावा किया कि वार्ड नंबर 77 में मुस्लिम मतदाताओं ने बड़ी संख्या में ममता बनर्जी को समर्थन दिया, जबकि हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध समुदाय के लोगों ने उन्हें वोट देकर जीत दिलाई।
नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों में जीत : शुभेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में डबल जीत दर्ज की है। नंदीग्राम सीट पर उन्होंने टीएमसी उम्मीदवार पबित्र कर को हराया, वहीं भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी पराजित कर राजनीतिक हलकों में बड़ा उलटफेर कर दिया।
कभी टीएमसी के संकटमोचक रहे शुभेंदु को भाजपा के सत्ता की चाबी : पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और तृणमूल कांग्रेस में नंबर-दो की हैसियत रखने वाले शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 1995 में कांग्रेस से अपनी सियासी पारी की शुरुआत करने वाले शुभेंदु 1998 में टीएमसी के गठन के साथ ही इसमें शामिल हो गए थे। वर्ष 2007 में ऐतिहासिक नंदीग्राम भूमि-अधिग्रहण विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर उन्होंने 34 साल पुराने वामपंथी शासन को उखाड़ फेंकने और टीएमसी को सत्ता के शिखर पर पहुंचाने में सबसे निर्णायक भूमिका निभाई थी। हालांकि, बाद के वर्षों में पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी का कद बढ़ने और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बढ़ते दखल से असंतुष्ट होकर उन्होंने बागी तेवर अपना लिए और अंततः दिसंबर 2020 में मंत्री पद व पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। अब उन्होंने अल्पसंख्यक प्रभाव वाले सीटों पर भी भाजपा के लिए अच्छी-खासी सीटें जीतकर टीएमसी को एक और बड़ा झटका दे दिया है।
आरजी कर रेप पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ की जीत : पश्चिम बंगाल की पानीहाटी विधानसभा सीट से एक भावनात्मक और अहम चुनावी नतीजा सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार रत्ना देबनाथ, जो आरजी कर अस्पताल रेप पीड़िता की मां हैं, ने टीएमसी के तीर्थंकर घोष को 28,836 वोटों के बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की।
शुभेंदु अधिकारी 15 हजार+ वोटों से जीते : ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से करारी हार का सामना करना पड़ा है। उनके प्रतिद्वंदी शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15,114 वोटों के अंतर से पराजित कर दिया।
ये चुनाव नहीं, लूट- ममता : पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह चुनाव नहीं बल्कि लूट है। भवानीपुर स्थित काउंटिंग सेंटर से बाहर निकलते हुए उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने 100 से ज्यादा सीटें गलत तरीके से हासिल की हैं। ममता ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्होंने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने केंद्रीय बलों और केंद्र सरकार पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही, हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी वापसी करेगी।
अधीर रंजन चौधरी चुनाव हारे : बहरामपुर सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा उम्मीदवार शुभ्रत मैत्रा ने उन्हें 17,548 वोटों के अंतर से पराजित किया, जिससे इस सीट पर बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला।
