मां कूष्मांडा : आज चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन…अष्टभुजी माता करती हैं ऊर्जा-सृजन और शक्ति का संचार

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नई दिल्ली : नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म के प्रमुख व्रत और त्योहारों में से एक माना जाता है। साल में चार बार मनाए जाने वाले नवरात्रि पर्व में से चैत्र नवरात्रि सबसे पहली होता है। इसे वसंत नवरात्रि भी कहते हैं और इसकी शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है। इसी तिथि हिंदू नव वर्ष भी शुरू होता है। इसलिए ये हिंदू वर्ष की पहली नवरात्रि होती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में हर दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नौ दिन की नौ देवियों में से चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित है। यह आज यानी 22 मार्च को किया जाएगा। माना जाता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से सृष्टि की रचना की है। इनके आशीर्वाद से सेहत, ऊर्जा और समृद्धि की प्राप्ति होती।

मां कूष्मांडा की पूजा का शुभ समय : चैत्र नवरात्रि की चतुर्थी तिथि पर मां कूष्मांडा की आराधना के लिए सुबह का समय श्रेष्ठ है। दृक पंचांग के अनुसार, 22 मार्च 2026 को पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से दोपहर 12:53 तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में की गई पूजा घर में बरकत और खुशहाली लेकर आती है।

मां कूष्मांडा नवरात्रि के चौथे दिन पूजी जाने वाली देवी दुर्गा का चौथा स्वरूप हैं, जिन्हें ‘सृष्टि की रचयिता’ माना जाता है। अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। आठ भुजाओं वाली (अष्टभुजा) माता सिंह पर सवार होकर, ऊर्जा, सृजन और शक्ति का संचार करती हैं।

मां कूष्मांडा से जुड़ी मुख्य बातें :

  • स्वरूप : मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी कहा जाता है। वह सिंह पर सवार हैं। मां कूष्मांडा आठ भुजाओं वाली हैं और अपने हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा धारण करती हैं।
  • पूजा का महत्व : देवी कूष्मांडा की पूजा से आयु, यश, बल और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। वह जीवन में चल रही बड़ी से बड़ी समस्या भी दूर कर देती हैं।
  • प्रिय भोग : मां कूष्मांडा को मालपुआ या मीठे भोग चढ़ाए जाते हैं।
  • प्रिय रंग : इस दिन पीला (Yellow) रंग बहुत शुभ माना जाता है, जो ऊर्जा और खुशी का प्रतीक है।
  • पूजा मंत्र : “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः”।

कूष्मांडा देवी का भोग : मां कूष्मांडा को हरे रंग का भोग लगाना चाहिए, यह उन्हें काफी प्रिय है। इसमें मां को हरे केले, अंगूर और शरीफ का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा माता को मालपूए का भोग काफी प्रिय है कहते हैं कि, माता को उनके पसंद का भोग लगाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।