नई दिल्ली : नवजात शिशु को होने वाला पीलिया कई बार गंभीर रूप ले लेता है। शरीर में बिलीरुबिन नाम का पीला पदार्थ बहुत ज्यादा बढ़ने पर यह दिमाग तक पहुंचकर उसकी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है। इससे बच्चे को सुनने, चलने-फिरने और सीखने-समझने से जुड़ी स्थायी परेशानियां होती हैं।
गंभीर पीलिया वाले नवजातों को मिलेगा लाभ : इस खतरे से निपटने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने एक नई नैनो-दवा विकसित की है। इसे तरल रूप में मुंह से दिया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से गंभीर पीलिया वाले नवजातों में मौत और खून बदलने की जरूरत कम होने के संकेत मिले हैं। यह दवा मैंगनीज ऑक्साइड के बेहद छोटे कणों से बनाई गई है। इन कणों की सतह पर साइट्रेट की परत चढ़ाई गई है। इसका मकसद खून में मौजूद बिलीरुबिन को पकड़कर उसे ऐसे पदार्थ में बदलना है, जिसे बच्चा मल और पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकाल सके।
