झारखंड : डीलिस्टिंग का IRS अधिकारी निशा उरांव ने किया समर्थन, बोली-आदिवासियों का हक सुरक्षित रहेगा

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रांची : भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की अधिकारी निशा उरांव ने डीलिस्टिंग की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि इससे मूल सरना सरना आदिवासी समाज को फायदा होगा। निशा उरांव का मानना है डीलिस्टिंग यानी धर्मांतरित लोगों को अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर करने से सरना परंपरा, संस्कृति और जल-जंगल और जमीन पर आदिवासियों का हक सुरक्षित रहेगा।

डीलिस्टिंग से पदों की पवित्रता : आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने कहा कि डीलिस्टिंग से ग्राम प्रधान ,पाहन ,महतो, पड़हा राजा जैसे पारंपरिक पदों पर सिर्फ मूल सरना धर्म के लोग ही आसीन हो सकेंगे। वर्तमान में अनुमानित 30-40 प्रतिशत पारंपरिक पदों पर धर्मांतरित आदिवासियों का कब्जा हैं।

सरना परंपराएं और मजबूत होगी : डीलिस्टिंग होने से ग्राम प्रधान, पाहन, महतो औरपाइनभरा जैसे पदों का सामाजिक और धार्मिक जिम्मेदारी दोनों दायित्वों का पालन होगा। इससे सरना परंपराएं और मजबूत होगी।

आदिवासियों की जमीन लूट पर लगेगी रोक : निशा उरांव के अनुसार गांव में मूल धर्म के आदिवासी को ‘पेसा कानून’ का ताकत मिलने से आदिवासी को जल-जंगल-जमीन पर अधिकार मिलेगा। उन्होंने कहा कि जल-जंगल-जमीन पर ताकत मिलने से आय बढ़ेगा, रोज़गार मिलेगा तथा जमीन लूट पर भी नियंत्रण होगा।

ईसाई पाहन के कब्जे से पहनाई जमीन वापस मिलेगी : धर्मांतरित आदिवासी डीलिस्ट होंगे तो ईसाई पाहन के कब्जे में पहनाई जमीन अपने आप गांव को वापस मिलेगी।

आरक्षण का लाभ केवल सरना धर्म के लोगों को मिलेगा : आरक्षण’ का लाभ केवल सरना (मूल धर्म) आदिवासी को मिलने लगेगा। युवा सरना आदिवासी को नौकरी मिलेगा। अभी अनुमानित 90 प्रतिशत आरक्षण का लाभ धर्मांतरित आदिवासी को मिल रहा है।

बेटी-बहन आदिवासी से बाहर करने पर डीलिस्टिंग हो जाएगी : निशा उरांव ने बताया कि जो बेटी गैर-आदिवासी बाहरी से शादी करेगी उसका भी डीलिस्टिंग हो जाएगा। डीलिस्टिंग से आदिवासी संख्या बढ़ेगी क्योंकि उसके बाद तेजी से घर वापसी होगी।

इस तरह से डीलिस्टिंग से सरना परम्परा और सरना समाज मजबूत होगा क्योंकि धर्म बचेगा। पेसा कानून का ताकत मिलेगा। जल-जंगल-जमीन पर अधिकार मिलेगा। अधिकार बढ़ने से गांव में रोज़गार बढ़ेगा , पलायन रुकेगा। जमीन लूट नियंत्रण होगा। बेटी बचेगी – क्योंकि उसको बाहरी से शादी करने से डिलिस्ट होने का खतरा रहेगा।आरक्षण से नौकरी मिलेगा। अभी धर्मांतरित आदिवासी ही नौकरी का फायदा ले रहे हैं।