रांची/पटना : उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है। चक्रवातीय दबाव और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण 1 मई को बिहार, झारखंड,दिल्ली, यूपी समेत कई राज्यों में भारी तबाही की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत और उपहिमालयी पश्चिम बंगाल में भारी बारिश हो सकती है। बिहार में आंधी और बिजली कड़कने के साथ ओले गिरने की पूरी संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। मौसमी बदलाव बिहार-झारखंड में भीषण गर्मी से राहत दे रहा। वहीं, किसानों के लिए काफी नुकसानदायक है।
मौसम विभाग के मुताबिक बिहार के पटना, गया, नालंदा, औरंगाबाद, रोहतास, सारण, भोजपुर, बक्सर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, भागलपुर, कटिहार, अररिया, किशनगंज, खगड़िया और भागलपुर में भारी बारिश और तूफान की संभावना है। सारण, भोजपुर, बक्सर, वैशाली, दरभंगा और भागलपुर जैसे जिलों में 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा के झोंके चलने का अनुमान है। राजधानी पटना में न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है, जिससे मौसम सुहावना रहेगा लेकिन वज्रपात का खतरा बना रहेगा।
झारखंड के रांची स्थित मौसम केंद्र के अनुसार राज्य के पलामू, गढ़वा, चतरा और देवघर समेत कई हिस्सों में बादल छाए रहेंगे। राज्य के पूर्वी और मध्य भागों में 50-60 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने और वज्रपात होने का अनुमान है। इस मौसमी बदलाव के कारण झारखंड के औसत तापमान में 2-4 डिग्री सेल्सियस की कमी दर्ज की गई है, जिससे लोगों को लू और झुलसाती गर्मी से राहत मिली है।
झारखंड के रांची, पलामू और देवघर सहित कई हिस्सों में बादल छाए रहेंगे। राज्य के पूर्वी और मध्य भागों में 50-60 किमी की गति से हवाएं चलेंगी। झारखंड में भी झुलसाती गर्मी से राहत मिलते हुए पारा 2-4 डिग्री तक लुढ़केगा।
सिक्किम, असम और मेघालय सहित पूर्वोत्तर राज्यों में स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। उपहिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 60 किमी/घंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश और बिहार में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कहीं-कहीं भारी वर्षा दर्ज की जाएगी। ओडिशा और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में भी गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहेगा। केरल और जम्मू-कश्मीर जैसे सुदूर राज्यों में भी बिजली कड़कने और हल्की बौछारें पड़ने के संकेत हैं।
तेज हवाओं और ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने को कहा है। कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे न रुकने की सलाह दी गई है। आने वाले 48 घंटे पूर्वी और उत्तर भारत के लिए बुनियादी ढांचे और किसानों के नजरिए से चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
