चंद्रग्रहण : आज साल का सबसे बड़ा पूर्ण चंद्रग्रहण, पृथ्वी की छाया में छिपकर सुर्ख लाल नजर आएगा चंद्रमा

Chandragrahan-2026-Holi

नई दिल्ली : देश के अधिकांश हिस्सों में यह अलौकिक दृश्य चंद्रमा उदय के समय अपने अंतिम चरण में नजर आएगा, वहीं पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आकाश में पूर्ण अवस्था की अंतिम झलक भी देखी जा सकेगी। ग्रहण के दौरान चंद्रमा लालिमा से आच्छादित होकर रक्तिम नारंगी आभा में दमकेगा, एक ऐसा मोहक दृश्य जिसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब घटित होती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव है, क्योंकि उसी समय सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में स्थित होते हैं। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया, जिसे उम्ब्रा कहा जाता है, में प्रवेश कर जाता है तो उसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहा जाता है।

  • पृथ्वी की छाया में छिपकर सुर्ख लाल नजर आएगा चंद्रमा
  • दोपहर 3:20 बजे आरंभ होकर शाम 6:48 बजे तक चलेगा
  • एशिया, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिखेगा ब्लड मून
  • साल 2028 के बाद बनेगा ऐसा संयोग

इसलिए दिखाई देता है चंद्रमा पूरा लाल : पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लाल दिखना एक वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम है। जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वातावरण से होकर गुजरता है, तो नीली और बैंगनी तरंगदैर्घ्य वाली रोशनी अधिक बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी रंग की रोशनी कम बिखरती है। यही लाल रोशनी पृथ्वी के वातावरण से मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती है और उसे लालिमा प्रदान करती है। यही कारण है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आकाश लाल या नारंगी दिखाई देता है।

भारत में कहां और कितना दिखेगा? : भारत के ज्यादातर हिस्सों में यह पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, हालांकि अधिकतर क्षेत्रों में लोग केवल अंतिम चरण देख पाएंगे। पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में चंद्रमा अपेक्षाकृत पहले उदित होगा, जिससे वहां पूर्ण अवस्था का अंतिम भाग भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। दक्षिण भारत के शहरों जैसे चेन्नई और कन्याकुमारी में यह ग्रहण लगभग 31 मिनट तक दिखाई दे सकता है।

दुनिया में कहां-कहां दिखाई देगा? : अनुमान है कि विश्व की लगभग 40% आबादी इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का कम से कम एक हिस्सा देख सकेगी। यह ग्रहण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका व यूरोप के कुछ हिस्सों में कई चरणों में दिखाई देगा। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।