झारखंड : JPSC परीक्षा संचालन की जिम्मेवारी ब्लैक लिस्टेड एजेंसी को मिली, जयराम ने गवर्नर से की शिकायत

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रांची : झारखंड में 14वीं जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमतताओं को लेकर राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी विधायक जयराम महतो ने इस पूरे मामले को लेकर राज्य सरकार और आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों नेताओं का कहना है कि जेपीएससी की ओर से परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी यूपी में ब्लैक लिस्टेड एजेंसी को सौंपी गई है। इस ब्लैक लिस्टेड एजेंसी की ओर से झारखंड में भर्ती परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री से जयराम महतो ने मुलाकात की : झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो ने मंगलवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की। इससे पहले सोमवार को देर शाम उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की थी। लोक भवन में राज्यपाल से मिलकर निकलने के बाद जयराम महतो ने बताया कि वो 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में हुई गड़बड़ियों का मुद्दा लेकर वह राजभवन पहुंचे, जहां उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं।

15 दिनों में मुख्य परीक्षा कराने पर उठाए सवाल : जयराम महतो ने आरोप लगाया कि आयोग और सरकार अपनी कमियों तथा गड़बड़ियों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परंपरा के मुताबिक प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के बाद मुख्य परीक्षा (मेंस) के लिए अभ्यर्थियों को कम से कम 45 दिनों का समय दिया जाता है। लेकिन इस बार अभ्यर्थियों को महज 15 दिनों का वक्त दिया गया है।

मामले को रफा-दफा करने की साजिश : जयराम महतो ने बताया कि इतनी जल्दबाजी में मुख्य परीक्षा आयोजित करने के पीछे की मंशा सिर्फ विवाद को खत्म करना और कमियों पर पर्दा डालना है। अधिकारियों की ओर से जनप्रतिनिधियों की बात न सुनने के सवाल पर जयराम महतो ने तीखा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राज्य में अफसरशाही पूरी तरह हावी है। जिला और राज्य स्तर के कई ऐसे अधिकारी हैं जो न तो ठीक से बात करते हैं और न ही जनसमस्याओं पर संज्ञान लेते हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रही इस व्यवस्था में पारदर्शिता का भारी अभाव है। अधिकारी उदासीन हो चुके हैं और अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर नहीं हैं।

परीक्षा परिणाम पर सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर तक नही-बाबूलाल : विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जेपीएससी परीक्षा परिणाम जारी कर दिया गया, लेकिन परिणाम पर सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर तक नहीं हैं। अभ्यर्थियों को न ओएमआर शीट उपलब्ध कराई गई और न ही आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी का संतोषजनक जवाब दिया गया। जब प्रशासनिक अधिकारियों का चयन करने वाली संस्था की कार्यप्रणाली ही सवालों के घेरे में हो, तो झारखंड के युवाओं का भरोसा कैसे कायम रहेगा?

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि इन्हीं सवालों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई को मजबूती देने के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेतृत्व में 22 जुलाई को जेपीएससी कार्यालय का घेराव कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।