झारखंड : JPSC अध्यक्ष का पद रिक्त नहीं रखा जा सकता है, 20 अगस्त तक जवाब दे सरकार- हाई कोर्ट 

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रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के अध्यक्ष का पद रिक्त नहीं रखा जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार से यह बताने को कहा कि आयोग में नए अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा- JPSC अध्यक्ष पद खाली नहीं रखा जा सकता : झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने ये टिप्पणी की। कोर्ट ने साफ कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के अध्यक्ष का पद खाली नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने इस मामले में हेमंत सरकार से 20 अगस्त तक जवाब मांगा है कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक की जाएगी।

वन विभाग में खाली पदों को भरना शुरू : वन विभाग में अधिकारियों और कर्मियों के रिक्त पदों पर नियुक्ति से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने अदालत को बताया कि वन विभाग में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (एसीएफ) और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) के पदों के लिए प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पूरी हो चुकी है। मुख्य परीक्षा का परिणाम भी जारी कर दिया गया है और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तिथि भी घोषित की जा चुकी है। हालांकि, जेपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे और आयोग से जुड़ी चल रही जांच के कारण नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

JPSC एक संवैधानिक संस्था: हाईकोर्ट : इस पर अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और उसके अध्यक्ष का पद लंबे समय तक खाली नहीं रखा जा सकता। अदालत ने महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह राज्य सरकार से इस संबंध में स्पष्ट निर्देश लेकर अगली सुनवाई में बताएं कि JPSC के नए अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक की जाएगी। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि वन विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार और आयोग से प्रगति रिपोर्ट भी मांगी।

झारखंड वन विभाग में बड़े पैमाने पर पद खाली हैं : बता दें कि झारखंड हाईकोर्ट वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़ी संख्या में रिक्त पदों के कारण वन संरक्षण और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ रहे असर को देखते हुए स्वत: संज्ञान लेकर मामले की निगरानी कर रहा है। अदालत पहले भी राज्य सरकार को रिक्त पदों पर समयबद्ध नियुक्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दे चुकी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।